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उप-समिति संख्या 6
(मताधिकार)
दूसरी बैठक - 22 दिसंबर, 1930
डॉ. अम्बेडकरऽः मैं समझता हूं कि इस गोलमेज सम्मेलन में केवल दो महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार किया जाएगा। पहला प्रश्न तो यह है कि क्या भारत को उत्तरदायी शासन सौंप दिया जाए? और दूसर प्रश्न यह है कि वह शासन किसके प्रति उत्तरदायी होगा?
पूर्ण अधिवेशनों में सभी ने एक स्वर से यह मांग की थी कि भारत में उत्तरदायी सरकार होनी चाहिए और मैंने उस पूर्ण अधिवेशन में दलित वर्गों की ओर से बोलते हुए विरोध पक्ष में बैठे अपने मित्रों की भारत के लिए उत्तरदायी सरकार की मांग का समर्थन किया था। लेकिन ऐसा करते हुए मुझे यह ख्याल था कि मेरे हम वतन साथी, जो इस गोलमेज सम्मेलन में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने आए हैं, वे न केवल उत्तरदायी भारत सरकार की मांग करने में एकजुट हैं, बल्कि इस संबंध में भी उनमें मतैक्य है कि वह सरकार किसके प्रति उत्तरदायी होगी।
महोदय! मुझे यह कहते हुए खेद है कि मुझे भ्रांति हुई। मैं अब देख रहा हूं कि हम में से कुछ लोगों की यह इच्छा होगी कि मैं और अन्य कुछ लोग डोमिनियन स्टेटस की मांग में उनका साथ दें, वे हमारी इस मांग में हमारा समर्थन नहीं करेंगे कि उस डोमियन स्टेटस के अधीन, जो सरकार बनाई जाएगी, वह भारत की जनता के प्रति कुल मिलाकर उत्तरदायी होगी। मैंने कभी यह सोचा ही नहीं था कि ऐसा मतभेद हो जाएगा और मुझे उस स्थिति का पक्षपोषण करना होगा, जो हमने अपनाई है।
महोदय! अब मैं दलित वर्गों की ओर से बोलते हुए ईमानदारी के नाते उत्तरदायी सरकार या डोमियन स्टेटस के लिए तब तक सहमत नहीं हो सकता, जब तक मुझे यह
ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 6 (फ्रेन्चाइज), पृ. 28-35
इस उप-समिति के विचारार्थ विषय निम्नलिखित थे-
‘पुरुषों तथा महिलाओं के लिए मताधिकार किन मुख्य सिद्धांतों पर आधारित होगा’।