उप-समिति संख्या 6
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यही निष्कर्ष निकालना चाहते हैं कि मताधिकार सीमित था, इसलिए कहीं कोई गड़बड़ नहीं हुई और उस देश में हरेक नागरिक उससे संतुष्ट था। निश्चय ही ऐसा नहीं था, यदि मेरे मित्र लॉर्ड शैप्Qट्सबरी की जीवनी और इंग्लैंड के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास का अध्ययन करें, तो उन्हें निश्चित रूप से यह पता चल जाएगा कि अनसुधरी संसद किसी के लिए वरदान सिद्ध नहीं हुई थी।
तीसरी बात जिसकी ओर मैं अपने मित्र का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं वह यह है कि यदि वास्तव में उनके कथन में गंभीरता है और वह जो कुछ कहते हैं, उस पर वास्तव में उनका विश्वास भी है कि वह भारत की जनता मताधिकार की पात्र नहीं है, तो उनके लिए उसके सिवाए कोई चारा नहीं कि वह भारत लौट जाएं और औपनिवेशिक दर्जे या उत्तरदायी सरकार की मांग न करे, क्योंकि यह निश्चित है कि यदि यह एक ऐसे सज्जन का मत है, जो इस बात की वकालत करता है कि भारतीय जनता मताधिकार का प्रयोग करने की पात्र नहीं है, शासन की जिम्मेदारियां अपने ऊपर लेने के योग्य नहीं हैं, तो मेरी समझ में नहीं आता कि वह किसके नाम पर उत्तरदायी सरकार की मांग करते हैं। क्या वह इस वर्ग के लिए? क्या अपने लिए? आखिर यह है किसके लिए? मेरी समझ में उत्तरदायी सरकार और औपनिवेशिक दर्जे के पक्ष में केवल एक ही दलील आती है और वह यही मान्यता है, जो किसी भी दलील का आधार बनती है कि भारत की जनता सरकार का दायित्व उठाने के लिए सर्वथा योग्य है। यदि मेरे मित्र यह मानते हैं कि भारत की जनता उस दायित्व का निर्वाह करने के लिए सक्षम नहीं है, तो इससे केवल यही निष्कर्ष निकलता है कि भारत की जनता को न तो औपनिवेशिक दर्जा दिया जाना चाहिए और न ही कोई जिम्मेदारी।
दूसरा तर्क यह दिया गया है कि यद्यपि वयस्क मताधिकार एक आदर्श हो सकता है, किंतु उसे इस समय लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि हमारे पास उसे कार्यरूप देने के लिए आवश्यक तंत्र मौजूद नहीं है। वैसे तो मेरी इस तर्क के साथ पूरी सहानुभूति है, लेकिन मैं यह बता देना चाहता हूं कि इस मत के विरोध में भी कुछ बातें हैं। आइए, यह देखें कि मताधिकार का वास्तव में अर्थ क्या है। जाहिर है कि मताधिकार का अर्थ केवल मत पेटी मात्र नहीं है, न इससे तात्पर्य मतदान के केंद्र और वहां मतदान अधिकारियों को बैठाने से है। मताधिकार का तात्पर्य उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण बातों से है। महोदय! मेरी समझ में मताधिकार का अर्थ आत्मरक्षा के अधिकार के अलावा और कुछ नहीं है, इसका अर्थ यह है कि आप एक ऐसे विधान-मंडल का निर्माण करेंगे, जो ऐसे अनेक कानून पारित करेगा, जो जनता के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति को प्रभावित करेंगे। यदि विधान-मंडल को इन सर्वाधिक महत्व के मामले में आपके जीवन को प्रभावित करने की वह शक्ति प्राप्त होगी, तो यह निश्चित है कि प्रत्येक व्यक्ति को, जो उस विधान से प्रभावित होगा, ऐसे कानूनों के खिलाफ अपने बचाव की शक्ति होनी चाहिए, जो हो सकता है, उसकी स्वतंत्रता का हनन करते हों, उसके