5. उप-समिति संख्या 6 (मताधिकार) - Page 86

उप-समिति संख्या 6

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अपनी बहस समाप्त करने से पहले मैं अपने उन मित्रों से एक-दो बातें कहना चाहता हूं, जो हमें वयस्क मताधिकार देना नहीं चाहते। मैंने अपने भाषण के प्रारंभ में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि भारत को उत्तरदायी सरकार देने का प्रश्न पूर्णतः इस प्रश्न पर निर्भर नहीं है। हालांकि मैं जानता हूं कि 80 या 90 लोगों के इस सम्मेलन में, मैं और मेरे मित्र केवल दो ही हैं, लेकिन हम 4 करोड़ 30 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

दीवान बहादुर रामचंद्र रावः क्या डॉ. अम्बेडकर लॉर्ड जैटलैंड का प्रस्ताव स्वीकार करेंगे?

डॉ. अम्बेडकरः हम प्रस्ताव स्वीकार कर सकते हैं। लेकिन मैं बता दूं कि मेरे पास इस विषय पर, जो मैंने उठाया है, सैकड़ों पत्र और तार आ रहे हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है।

माननीय पी.सी. मित्तरः केंद्रीय विधान-मंडल के बारे में आपका क्या मत है? क्या आप वयस्क मताधिकार चाहते हैं और यदि हां तो विधान-मंडल का क्या आकार हो?

डॉ. अम्बेडकरः इस प्रश्न पर बाद में निर्णय किया जाएगा। जहां तक केंद्रीय विधान-मंडल का प्रश्न है, मेरी राय में उसमें 500 सदस्य होने चाहिए।

माननीय पी.सी. मित्तरः और वयस्क मताधिकार भी हो?

डॉ. अम्बेडकरः जी हां।

* * * *

माननीय कावसजी जहांगीरऽः बेगम साहिबा से क्षमा याचना करते हुए मैं यह कहना चाहता हूं कि इस प्रकार के सभी सुझाव इस भावना से उद्भूत होते हैं कि मताधिकार ही परिषदों में प्रतिनिधित्व का आधार होता है। ऐसा ही सब देशों में है भी। लेकिन जहां हमने समुदायों के लिए वरीयता का सिद्धांत लागू कर दिया है, वहां मताधिकार के सिद्धांत की प्रासंगिकता नहीं है।

लेफटी. कर्नल गिडनेः मैं एक ठोस सुझाव देना चाहता हूं और मेरा ठोस सुझाव है कि लॉर्ड जैटलैंड द्वारा सुझाई गई योजना को अपनाने के लिए हमें प्रत्यक्ष तथा परोक्ष, दोनों प्रकार के चुनाव कराने चाहिए। जहां तक प्रत्यक्ष चुनाव का संबंध है, मेरा सुझाव यह है कि मताधिकार को अब और व्यापक न बनाया जाए और वर्तमान मताधिकार यथावत् बना रहे।

डॉ. अम्बेडकरः जी नहीं।

लेफटी. कर्नल गिडनेः ठीक है।

माननीय कावसजी जहांगीरः चुनाव से विधान-मंडल के लिए कुछ प्रतिनिधि शहरी और ग्रामीण, दोनों निर्वाचन-क्षेत्रों से चुनकर आ जाएंगे, लेकिन अधिसंख्य लोग प्रत्यक्ष मत से वंचित रह जाएंगे और इसलिए जनसंख्या के उस समूचे खंड के लिए मताधिकार

ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 6 (फ्रेन्चाइज), पृ. 68-69