उप-समिति संख्या 6
71
से गांव वालों के सशक्त संगठनों का प्रभुत्व है, जो सामाजिक तथा आर्थिक दृष्टि से उन पर हावी हैं, यह संभव है, बल्कि मैं समझता हूं कि ऐसा ही होगा कि जब भी यह परोक्ष निर्वाचन उन पर लागू किया जाएगा, ग्रामीण समुदाय दलित वर्गों पर इतना जबरदस्त दबाव डालेंगे कि प्राथमिक निर्वाचन में अपना मत देते समय उन्हें ऐसे लोगों को चुनने पर बाध्य होना पड़ेगा, जो उनके सबसे अच्छे प्रतिनिधि नहीं हैं। सच तो यह है कि मुझे इसी बात का डर है।
दूसरी बात मैं जो देख रहा हूं वह यह है कि यदि इस प्रणाली को किस्तों के रूप में मतों के विस्तार की चरणबद्ध प्रणाली पर वरीयता देकर अपनाया जाना है, तो मेरी समझ में यह नहीं आता कि हम उसे केवल धनी वर्ग या किसी दूसरे वर्ग तक ही क्यों सीमित रखें? मैं समझता हूं कि हम उस प्रणाली का इस ढंग से क्यों न विस्तार करें कि वयस्क मताधिकार इस प्रणाली की आधारशिला बन जाए?
एक सदस्यः यही तो हमारा उद्देश्य है।
डॉ. अम्बेडकरः यह सुनकर मुझे प्रसन्नता हुई कि जहां तक उन कठिनाइयों का सवाल है, जिनकी ओर संकेत किया गया है कि उससे पृथक निर्वाचक-मंडल का मामला और पेचीदा हो जाएगा, मैं समझता हूं कि ऐसा नहीं होगा, क्योंकि परोक्ष निर्वाचन की स्थिति में भी आप ऐसे समुदायों के लिए, जो चाहते हों, पृथक रजिस्टर भी रख सकते हैं। मैं नहीं समझता कि उससे इस मामले में कोई कठिनाई होगी।
लेकिन, जैसा कि मैंने कहा है, जब तक यह न जान लें कि इस सिद्धांत पर किस तरह अमल किया जाएगा और इसका संपूर्ण ब्यौरा हमारे सामने न आ जाए, हम इसका समर्थन नहीं कर सकते। इसलिए मेरा ठोस सुझाव यह है कि यह समिति इस प्रणाली पर सोच-विचार करने और उस पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक उप-समिति नियुक्त करें, ताकि हमें इसकी सम्यव्Q जानकारी मिल जाए और हम बेहतर ढंग से इसकी सिफारिश मताधिकार समिति से कर सकें, जो आगे चलकर इस प्रणाली की रूपरेखा तैयार करे। मेरा विचार है कि इस योजना को सच्चे रूप में स्वीकृति दे देना कुछ मुश्किल जान पड़ता है, नोबल लॉर्ड मुझे इस अभिव्यक्ति के प्रयोग के लिए क्षमा करें। वैसे भी यह कार्य इतना विशाल है कि हममें से शायद ही कोई इसे अपना सके और यदि मैं अपने ही बारे में कहूं, तो इस सिद्धांत को समर्थन देना संभव नहीं है।
* * * *
श्री बसुऽः क्या अधिकतम संख्या देने की कोई आवश्यकता है, जब कि मताधिकार समिति तो होगी ही और उसे ही इस समस्या पर विस्तार से विचार करना है। मैं समझता हूं कि हमें न्यूनतम संख्या ही लेनी चाहिए और वह पर्याप्त होगी। जहां तक अधिकतम का प्रश्न है, उसका निर्णय उन्हीं पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 6 (फ्रेन्चाइज), पृ. 74-75