5. उप-समिति संख्या 6 (मताधिकार) - Page 92

उप-समिति संख्या 6

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न ही ऐसा करने से प्रांतों में उपलब्ध निर्वाचन तंत्र पर भी कोई भारी दबाव नहीं पड़ता, क्योंकि दलित वर्गों की वैसे भी विशिष्ट स्थिति थी और फिर इस संबंध में भी मतैक्य था कि मताधिकार की कोई दूसरी प्रणाली उन्हें मत नहीं देगी और फिर बिना मत के कोई भी उम्मीदवार जो इस समय विधान-मंडल के लिए खड़ा होगा उनके प्रति किसी सहानुभूति का भाव प्रकट नहीं करेगा। मैं समझता हूं कि यदि समिति इस सिद्धांत को दलित वर्गों पर लागू करने के तर्क को मान लें, तो इससे कोई भारी नुकसान नहीं होगा।

तीसरी बैठक - 30 दिसंबर, 1930

अध्यक्षऽः अब हम शैक्षिक अर्हता के प्रश्न पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आपको यह याद दिला दूं कि हम जिस दूसरे निष्कर्ष पर पहुंचे थे, वह यह थाः ‘हम सिफारिश करते हैं कि किसी विशेष क्षेत्र में मताधिकार संबंधी अर्हता सभी समुदायों के लिए समान हो, लेकिन हमारी यह इच्छा है कि विशेषज्ञ मताधिकार समिति अपने प्रस्ताव रखते समय यह बात ध्यान में रखे कि आदर्श प्रणाली जहां तक संभव हो सकेगा, प्रत्येक समुदाय को उसकी जनसंख्या के अनुपात में मतों का वितरण करेगी और इस समिति को अपने मताधिकार का निर्धारण जहां तक व्यवहार्य हो इस प्रकार करना चाहिए कि उसका यही परिणाम हो।’ मेरा विचार है कि यह एक आदर्श परामर्श है, लेकिन साथ ही जिस ढंग से इसे कार्य रूप देने की उनसे अपेक्षा की जाती है, उसके लिए यह आवश्यक है कि हम उन्हें कुछ स्वतंत्रता दें, यह बिल्कुल स्पष्ट बात है। इसलिए शैक्षिक अर्हता आदि की समस्याओं पर विचार करते समय आपको यह याद रखना है कि यदि आपने मताधिकार समिति को इन बातों का ध्यान रखने के लिए विशिष्ट अधिकार नहीं दिया, तो आप उनके कार्य की संभावना को बढ़ाने की बजाए घटा देंगे।

डॉ. अम्बेडकरः महोदय! यदि अनुमति हो, तो मैं उस निष्कर्ष के संबंध में एक प्रश्न पूछना चाहता हूं, जो आपने अभी पढ़कर सुनाया है और जिस पर जैसा कि आपने बताया उपसमिति पहुंची है। क्या इस निष्कर्ष का यही निहितार्थ है कि मताधिकार समिति को विभिन्न समुदायों के लिए विभिन्न प्रकार के मताधिकार पर विचार करने और इस परिणाम पर पहुंचने की स्वतंत्रता होगी कि मतदाताओं की संख्या उन समुदायों की संख्या के अनुपात में होगी?

अध्यक्षः मैं नहीं समझता कि यह सही है। हमें मताधिकार समिति का मार्गदर्शन भर करना है, ब्यौरे के बारे में वह खुद निर्णय करेगी। हम तो मानों वास्तुकार हैं और वे राजमिस्त्री और भवन-निर्माता।

डॉ. अम्बेडकरः यह तो मैं समझ रहा हूं, लेकिन मैं जानना चाहता हूं कि क्या यह

ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 6 (फ्रेन्चाइज), पृ. 94