76 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
निष्कर्ष मताधिकार समिति को यह स्वतंत्रता देता है कि यह समानता स्थापित करने के उद्देश्य से विभिन्न समुदायों के लिए भिन्न-भिन्न मताधिकार की व्यवस्था करेगी।
अध्यक्षः जी नहीं। पहले वाक्य में ही कहा गया है कि हमारी यह सिफारिश है कि किसी भी क्षेत्र विशेष में मताधिकार की अर्हता सभी समुदायों के लिए समान होनी चाहिए। अब हम शैक्षिक अर्हता पर अपनी चर्चा आगे बढ़ाते हैं।
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श्री जाधवऽः क्या किसी विधान परिषद के पास यह शक्ति होगी कि वह दस वर्ष के बाद अपना निर्णय बदल दे और मताधिकार को सीमित कर दे। संभव है, उनमें से कुछ ऐसा ही करना चाहें।
अध्यक्षः उनकी शक्तियां बढ़ाने के लिए होंगी, घटाने के लिए नहीं।
डॉ. अम्बेडकरः मैं इस विषय पर दो शब्द कहना चाहता हूं, जिसका अब तक अपनाए गए रुख पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। मुझे लगता है कि जो भी विकल्प अब तक सुझाए गए हैं, उनकी तुलना में एक सुझाव श्री जोशी ने दिया है कि ऐसा कानून बना दिया जाए, जिसमें अपने आप विस्तार की व्यवस्था हो और दूसरा जो मुख्य प्रस्ताव है, वह यह है कि यह मामला विधान-मंडलों की स्वेच्छा पर छोड़ दिया जाए। साइमन कमीशन ने, जो सिफारिशें की हैं, वे मुझे कहीं बेहतर लगती हैं, और मेरे दृष्टिकोण से उन्हें अधिक तत्परता के साथ स्वीकार कर लिया जाना चाहिए। मेरा कहना है कि इससे भी कहीं बेहतर होगा कि एक ऐसे प्राधिकरण की स्थापना की जाए, जो एक निश्चित अवधि के बाद इस बात की जांच-पड़ताल करे कि इस अवधि तक मताधिकार के प्रयोग का क्या परिणाम हुआ है। वही संस्था यह भी जान पाएगी कि विभिन्न प्रांतों में किस प्रकार की असंगति हुई है। वही संस्था यह भी देखेगी कि दस वर्ष के अंत में वह कौन-सा तंत्र बच पाया है, जो मताधिकार के बदल दिए जाने पर चुनाव कराने का दायित्व संभाल सकता है, और वही संस्था, जो स्वयं निष्पक्ष होगी, उस विशाल जनता के अधिकारों को अधिक तत्परता के साथ दिला सकेगी और वह ऐसा उन लोगों की अपेक्षा कहीं अधिक न्यायपूर्ण और उचित ढंग से कर पाएगी, जिनमें वर्ग-चेतना प्रबल है और जिन्हें उस समिति में मताधिकार के फलस्वरूप नियुक्त कर दिया गया है, जिसे हम आज ला रहे हैं। इन्हीं कारणों से मुझे लगता है कि साइमन कमीशन के प्रस्ताव उपर्युक्त विकल्पों से कहीं बेहतर हैं।
माननीय कावसजी जहांगीरः उस प्राधिकरण की स्थापना कौन करेगा?
डॉ. अम्बेडकरः जिस प्रकार संसद ने अधिनियम में यह सुझाव दिया था कि एक लोक सेवा आयोग होना चाहिए, उसी प्रकार यह सुझाव दिया जा सकता है कि एक समिति गठित की जाए।
माननीय कावसजी जहांगीरः केंद्रीय सरकार द्वारा?
ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 6 (फ्रेन्चाइज), पृ. 138-39