उप-समिति संख्या 6
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डॉ. अम्बेडकरः जी हां।
अध्यक्षः मैं समझता हूं कि अब इस विषय पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए मुझे काफी जानकारी प्राप्त हो गई है। लेकिन मैं यह जानना चाहता हूं कि आपकी क्या राय है? मेरा मतलब यह नहीं है कि हम यहां इसी समय यह सिफारिश कर दें कि कोई भी विशेषज्ञ मताधिकार समिति या कोई अन्य समिति 15 वर्ष के बाद गठित की जाए। लेकिन इस संभावना के मद्देनजर कि एक प्रांत अपने मताधिकार का दूसरे की अपेक्षा अधिक उदारता के साथ विस्तार कर ले, जिससे कि सारा मामला अस्तव्यस्त हो जाए, क्या हम किसी ऐसी संस्था के गठन की संभावना पर विचार कर सकते हैं, जो उस मामले को संभाल सके और प्रयत्न करके उनमें समायोजन कर सके, या हम सब कुछ प्रांतों पर छोड़ दें, या हम डॉ. अम्बेडकर द्वारा सुझाए गए समिति के विचार का अनुसरण करें? हमें यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि वह समिति बन चुकी है या वह कब बनेगी? लेकिन यह जरूर कह सकते हैं कि यदि वह बन गई, तो चलेगी भी?
श्री बसुः किसी भी समय जब केंद्र सरकार सीमति नियुक्त करने की इच्छुक होगी।
अध्यक्षः हम यह तो नहीं कह सकते कि वह कैसे नियुक्त होगी, लेकिन इस प्रकार की संस्था की नियुक्ति की संभावना के बारे में आपका क्या कहना है?
दीवान बहादुर रामचंद्र रावः मेरा विचार है कि भारत सरकार को ऐसी संस्था स्थापित करनी चाहिए, संसद को ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है।
डॉ. अम्बेडकरः लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है?
दीवान बहादुर रामचंद्र रावः हम इन सभी मामलों में बहुत अधिक स्वतंत्रता दे रहे हैं। मैं चाहता हूं कि इन पर से संसद का नियंत्रण समाप्त कर दिया जाए। मैं जानना चाहता हूं कि प्रस्ताव क्या है। यदि आप यह कहना चाहते हैं कि कुछ वर्षों के बाद भारत सरकार इस प्रकार की समिति नियुक्त करने में समर्थ होगी, जो समस्त प्रांतों में इस समस्या पर विचार कर सकेगी, तब तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन यदि यह ऐसा प्रश्न हो कि जिस पर संसद को हर दस वर्ष बाद विचार करना होगा, तो मैं इस पर आपत्ति करता हूं। मुझे समिति की नियुक्ति पर कोई आपत्ति नहीं है, जिसकी नियुक्ति से मताधिकार का विस्तार होगा, लेकिन मैं चाहता हूं कि समस्त शक्ति भारत सरकार में निहित हो और जब कभी आवश्यक हो, इसका प्रयोग उसी के विवेक के अनुसार किया जाए, कुछ निश्चित अवधि में या कुछ वर्षों के बाद।
डॉ. अम्बेडकरः इस बात का इस उप-समिति के कामों से क्या संबंध है, चाहे यह समिति संसद द्वारा नियुक्त की जाए या भारत सरकार द्वारा?
दीवान बहादुर रामचंद्र रावः हम प्राधिकार संसद से भारत को सौंप रहे हैं, क्योंकि 1919 में जब यह प्रश्न संसदीय समिति के समक्ष प्रस्तुत हुआ, तो मैंने और मेरे साथ कई दूसरों ने यह दावा किया कि इस प्रकार के प्रश्न तो भारत के प्राधिकारियों को