5. उप-समिति संख्या 6 (मताधिकार) - Page 95

78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सौंप दिए जाने चाहिएं और चूंकि इस पर कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए आज हमारे सामने मताधिकार से संबंधित अनेक शिकायतें हैं, जिनकी अब छानबीन हो रही है, और उनकी छानबीन इसलिए नहीं की जा सकी कि इसके लिए संसद की अनुमति लेना आवश्यक है। मेरा सुझाव है कि उस दिशा में जो कदम उठाया जाए, वह यह है कि समस्त शक्ति भारत सरकार को सौंप दी जाए, जिसका प्रयोग वह अपने विवेकानुसार मताधिकार के समस्त प्रश्न पर कार्रवाई करने के लिए कुछ वर्षों तक करती रहेगी। यही वह मुद्दा है, जिस पर बल देने की मेरी अब इच्छा है।

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डॉ. अम्बेडकरऽः अब यह मुझे और मेरे कुछ मित्रों को तो कम से कम स्पष्ट हो गया है कि हमें कुछ प्रस्तावों पर अपनी विमत टिप्पणी देनी होगी, जो उप-समिति के सामने रखी जाएगी। क्या हमें इसकी अनुमति होगी कि हम उन विभिन्न मुद्दों पर आपको विमत टिप्पणी प्रस्तुत कर सकें, जिसे आप कृपा करके रिपोर्ट के साथ संलग्न कर दें या आप हमें कोई और पद्धति अपनाने की अनुमति प्रदान करेंगे?

अध्यक्षः मेरा विचार है कि अभी तक तो किसी उप-समिति ने अल्पसंख्यक रिपोर्ट संलग्न की नहीं है। मैं समझता हूं कि उप-समिति की रिपोर्ट ही एकमात्र रिपोर्ट है, लेकिन उसी के मुखपृष्ठ पर यह निर्देश किया गया है कि कुछ सदस्यों ने, यदि जरूरी हो तों उनके नामों का उल्लेख कर दिया जाए, असहमति व्यक्त की है।

डॉ. अम्बेडकरः मैं आपकी अनुमति से एक नुकसान की ओर संकेत करना चाहूंगा, जो मुझे उस प्रक्रिया में दीख पड़ा है। यदि हमें अपनी विमत टिप्पणी देने की अनुमति नहीं मिलती, तो इसका यह मतलब होगा कि आप हमें अपने सुझावों को ठोस रूप में प्रस्तुत करने का अवसर नहीं देना चाहते, जो यदि हमें अनुमति लिम जाए, तो हम करना चाहते हैं। हमें तो यह कहने की नकारात्मक स्वतंत्रता मिली हुई है कि हम असहमत हैं और बस।

अध्यक्षः मैं निश्चयपूर्वक यह नहीं कह सकता कि आपकी मांग पूरी हो सकती है या नहीं। मैं समझता हूं कि आपने अपनी आपत्ति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। आप दरअसल वयस्क मताधिकार चाहते हैं ओर मेरा ख्याल है कि उसमें एक वाक्य इस बात का निर्देश करता है कि हमारी उप-समिति के कुछ सदस्यों ने, जिनके नाम भी दे दिए गए हैं, इस पर इसलिए आपत्ति की है कि उनके विचार में वयस्क मताधिकार की प्रणाली ही एकमात्र संतोषजनक प्रणाली है। इसी से बात स्पष्ट हो जाती है।

डॉ. अम्बेडकरः हम जो कुछ करना चाहते हैं, वह रिपोर्ट पर निर्भर है।

अध्यक्षः जब कठिनाई सामने आएगी, तब देखा जाएगा और तभी देखेंगे कि आपकी बात मानी जा सकती है या नहीं। मेरे विचार से मानी जा सकती है।

ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 6 (फ्रेन्चाइज), पृ. 147-48