5. उप-समिति संख्या 6 (मताधिकार) - Page 96

उप-समिति संख्या 6

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चौथी बैठक - 1 जनवरी, 1931

मसौदा रिपोर्टऽ - मुद्दा 4

  1. मताधिकार का विस्तार ः चूंकि इस बात पर आम सहमति थी कि वयस्क मताधिकार ही हमारा लक्ष्य है, जिसे अंततोगत्वा प्राप्त करना है, यह भी मान लिया गया कि मताधिकार का आधार तत्काल विस्तृत किया जाए और उसमें भारी वृद्धि की जाए।

इस बात पर कुछ मतभेद था कि वर्तमान परिस्थितियों में यह किस सीमा तक व्यवहार्य होगा और यह महसूस किया गया कि उप-समिति के पास यह निर्धारित करने के लिए ऐसे उपाय की क्या निश्चित सीमा हो, आवश्यक सामग्री नहीं है। सांविधिक आयोग ने सुझाव दिया कि निर्वाचकों की संख्या में इतनी वृद्धि की जाए, जो उस संख्या को जनसंख्या के दस प्रतिशत भाग तक पहुंचा दे। हमारे कुछ सदस्यों का विचार था कि वयस्क जनसंख्या में 25 प्रतिशत की वृद्धि तत्काल की जा सकती है।

हम सिफारिश करते हैं कि एक विशेष मताधिकार आयोग की नियुक्ति की जाए, जिसको मतदाताओं की संख्या में तत्काल वृद्धि करने की व्यवस्था करने के लिए अनुदेश दिए जाएं। इससे कुल जनसंख्या के कम से कम दस प्रतिशत भाग को उससे भी बड़ी संख्या को लेकिन कुल जनसंख्या के 25 प्रतिशत से अधिक मत नहीं देने का अधिकार दिलाया जा सकेगा, बशर्ते कि पूरी जांच पड़ताल के बाद ऐसा किया जाना व्यवहार्य और वांछनीय प्रतीत हो।

हम सिफारिश करते हैं कि आयोग को इस वृद्धि की तत्काल व्यवस्था करने के अलावा ऐसी योजना शुरू करने पर विचार करना चाहिए, जिसके अनुसार सभी वयस्कों को जिन्हें प्रत्यक्ष मत देने का अधिकार नहीं है, बीस-बीस के प्राथमिक वर्गों में वर्गीकृत कर दिया जाए, ताकि प्रत्येक वर्ग से एक प्रतिनिधि सदस्य का चुनाव किया जा सके, जो प्रांतीय चुनावों में उन्हें निर्वाचन-क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रूप से अर्ह-मतदाताओं के रूप में या उनके लिए बनाए गए पृथक निर्वाचन-क्षेत्रों में मत देने का पात्र हो। श्री जोशी, श्री शिवराव, डॉ. अम्बेडकर और श्री श्रीनिवासन ने इन प्रस्तावों को ‘अवर श्रेष्ठ’ की कोटि में रखा है और उनका विचार है कि वयस्क मताधिकार का तात्कालिक प्रवर्तन व्यवहार्य भी है और वांछनीय भी।

माननीय कावसजी जहांगीरः माननीय पी.सी. मित्तर और श्री बसु हमारे सुझाए गए अधिकतम या न्यूनतम से सहमत नहीं हैं, बल्कि वे तो चाहते हैं कि मताधिकार आयोग का विवेकाधिकार सर्वथा स्वच्छंद हो।

मसौदा रिपोर्ट के मुद्दा सं. 4 पर चर्चाऽ

डॉ. अम्बेडकरः मैं पैराग्राफ 4 में एक संशोधन का प्रस्ताव रखना चाहता हूं और

ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 6 (फ्रेन्चाइज), पृ. 149-50