उप-समिति संख्या 6
समिति उस पर विचार कर सके।
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अध्यक्षः मैं नहीं समझता कि उससे समिति का बहुमत सहमत हो जाएगा। मेरा विचार है कि समिति के अधिसंख्य लोग यह महसूस करेंगे कि शब्दों को सशर्त न बनाया जाए।
अब यह बताइए कि अगले वाक्य के बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है, जो इस प्रकार शुरू होता है, ‘हम सिफारिश करते हैं कि एक विशेष मताधिकार आयोग नियुक्त किया जाए जिसे अनुदेश दिए जाएं कि वह मतदाताओं की संख्या तत्काल बढ़ाने की व्यवस्था करे, ताकि उससे कुल जनसंख्या के कम से कम दस प्रतिशत, बल्कि इससे भी बड़े भाग को - लेकिन जो कुल जनसंख्या के बीस प्रतिशत भाग से अधिक न हो, मतदान का अधिकार प्राप्त हो। ऐसा तभी किया जाए, जब पूरी जांच-पड़ताल के बाद ऐसा करना व्यावहारिक तथा वांछनीय जान पड़े।’
डॉ. अम्बेडकरः मैं पृष्ठ 3 पर एक संशोधन करना चाहता हूं। ‘लेकिन नहीं’ के स्थान पर ‘बल्कि’ रख दिया जाए।
अध्यक्षः हममें से अधिसंख्य का, जिनमें मैं भी शामिल हूं, यह विचार था कि 25 प्रतिशत की तत्काल वृद्धि भी कुछ खींच-तान से ही की जा सकती है और इसलिए मैं समझता हूं हमसे इसे और अधिक खींचने का आग्रह नहीं किया जाना चाहिए, अब डॉ. अम्बेडकर!
डॉ. अम्बेडकरः मेरा दूसरा संशोधन यह है कि ‘और वांछनीय’ शब्द निकाल दिए जाए। यह मामला, चाहे जो वृद्धि भी वांछनीय हो या नहीं, ऐसा है जिसका निर्णय समिति को ही करना चाहिए। इसका निर्णय विशेषज्ञ मताधिकार आयोग नहीं कर सकता। आयोग की नियुक्ति तो इसलिए की जाती है कि वह उन निर्णयों को कार्य रूप देने के उपाय तलाश करे जो हमने किए हैं। यह मामला कि कितनी वृद्धि वांछनीय है, निश्चित रूप से ऐसा है, जो नए मताधिकार आयोग की सामर्थ्य पर नहीं छोड़ा जा सकता। इस दृष्टि से देखा जाए, तो मेरे विचार में इन शब्दों को निकाल देना जरूरी है।
अध्यक्षः क्या व्यवहार्य है और क्या वांछनीय, इन दोनोंको अलग करना बहुत मुश्किल है। ‘व्यवहार्य’ शब्द में बड़ा लचीलापन है। इसे प्राप्त करना बहुत ही कठिन काम है या तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो बहुत आसान भी है, लेकिन इसे प्राप्त करना संभव भी हो सकता है और तब आप इसे व्यवहार्य कहते हैं। वांछनीयता पर विचार करते समय आप अपने मस्तिष्क से इस बात को नहीं निकाल सकते कि वह किस सीमा तक व्यवहार्य है। इन दोनों को किसी हद तक दूसरे के निकट आना ही होगा।
डॉ. अम्बेडकरः हमने यह निर्णय किया है कि हमारी राय में ऐसी वृद्धि जिसमें 25 प्रतिशत जनसंख्या आती हो, वांछनीय है।
अध्यक्षः आपने ‘व्यवहार्य’ जैसे लचीले शब्द का प्रयोग किया है और यही मेरे लिए उलझन की बात है। आप इन दोनों शब्दों को एक दूसरे से अलग-अलग नहीं रख