1. हिंदुत्व का दर्शन - Page 100

हिंदुत्व का दर्शन

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1.95 ब्राह्मण के मुख से देवता लोग हव्य को तथा पितर लोग कव्य के

खाते हैं, अतः ब्राह्मण से अधिक श्रेष्ठ प्राणी कौन होगा।

1.96 भूतों में प्राणधारी जीव श्रेष्ठ है, प्रणियों में बुद्धिजीवी श्रेष्ठ है, बुद्धिजीवियों

में मनुष्य श्रेष्ठ है और मनुष्यों में ब्राह्मण श्रेष्ठ है।

ब्राह्मण प्रथम श्रेणी का मनुष्य है, क्योंकि ईश्वर ने उसे देवताओं का तथा पितरों की आत्माओं की आहुति देने के लिए अपने मुख से निर्मित किया, इसके अलावा, ब्राह्मण की श्रेष्ठता के मनु ने कुछ और कारण बताएं हैं, वह कहता हैः

1.98 केवल ब्राह्मण की उत्पत्ति ही धर्म की नित्य देह है, क्योंकि धर्म के

लिए उत्पन्न ब्राह्मण मोक्षलाभ के योग्य है।

1.99 उत्पन्न होते ही ब्राह्मण पृथ्वी पर श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि वह धर्म

की रक्षा के लिए समर्थ होता है। मनु यह कहते हुए उपसंहार करता हैः

1.101 ब्राह्मण अपना ही खाता है, अपना ही पहनता है, अपना ही दान

करता है, तथा दूसरे व्यक्ति ब्राह्मण की दया से सबका भोग करते है।

मनु का कहना हैः

1.100 विश्व-भर में जो कुछ भी है, वह सब कुछ ब्राह्मण की संपत्ति है।

अपने सर्वश्रेष्ठ जन्म के कारण ही ब्राह्मण इन सभी के लिए पात्र है।

मनु ने निर्देश दिया हैः

7.37 राजा प्रातःकाल उठकर ऋग्यजुस्राम के ज्ञाता और विद्वान ब्राह्मणों

की सेवा करे और उनके कहने के अनुसार कार्य करें।

7.38 वह वृद्ध, वेद ज्ञात और शुद्ध हृदय वाले ब्राह्मण की नित्य सेवा

करें।

9.3.13 यद्यपि कितनी भी भारी पैसे की तंगी हो, राजा को ब्राह्मण की

संपत्ति छीनकर उसे क्रोधित नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह अगर क्रोधित हो

जाए तो तुरंत ही तपस्या से और श्राप देकर राजा को उसकी सेना, हाथी,

घोड़े और रथ आदि सभी के साथ नष्ट कर सकता है।

अंत में मुन कहता हैः

11.35 शास्त्रोक्त कर्मां का करने वाला, पुत्र-शिष्यादि को शासन करने वाला,

प्रायश्चित विधि आदि का कहने वाला ब्राह्मण सबका मित्र रूप है, अतएव

उससे अशुभ वचन तथा रूखी बात नहीं करनी चाहिए।

10.122 परंतु स्वर्ग-प्राप्ति की इच्छा से अथवा इस जन्म में अगले जन्म के

उद्देश्य से शूद्र को ब्राह्मण की सेवा करनी चाहिए, क्योंकि जिसे ब्राह्मण

का सेवक माना जाता है, उसे सभी सुख-शांति प्राप्त होती है।