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हिंदुत्व का दर्शन

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अपना चित्र खिचवाया था। उसने नीत्शे के सभी मूल लेख अपनी विशेष निगरानी में रखे। उसके लेखों से कुछ उदाहरण निकाले और उसे नाजीवाद के समारोहों में नए जर्मन धर्म के रूप में घोषित किया। नीत्शे नाजीवाद लोगों का आघ्यात्मिक पूर्वज है, इस बात से नीत्शे के नजदीकी संबंधियों ने भी इंकार नहीं किया। नीत्शे के चचेरे भाई रिचार्ड औलचर ने यह बात कबूल की है कि हिटलर की सक्रियता नीत्शे के विचारों की परणति है और नाजी लोगों के सत्ता में आने के पीछे नीत्शे की ही मूल प्रेरणा थी। स्वयं नीत्शे की बहन ने अपनी मृत्यु से कुछ दिन पूर्व हिटलर को उसके भाई को सम्मानित करने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि जरथुस्त्र में जिस महामानव का वर्णन किया गया है, उसका अवतार वह हिटलर में देखती है।

नीत्शे, जिसके दर्शन से इतनी तीव्र उपेक्षा तथा डर पैदा होता है, उसकी बराबरी मनु के साथ करने के निश्चित ही हिंदुओं को अचंभा हो सकता है और उनके मन में क्रोध भी पैदा हो सकता है। परंतु इस सच्चाई के बारे में कोई संदेह नहीं किया जा सकता है। नीत्शे ने स्वयं यह बात कही है कि उसके दर्शन में उसने केवल मनु की योजना का अनुसरण ही किया है। अपनी एंटी क्राइस्ट पुस्तक में नीत्शे ने कहा हैः

अंततः प्रश्न यह है कि झूठ किस सीमा तक बोला जाए? इस सत्य को कि ईसाई धर्म में पवित्र उद्देश्यों का अभाव है, जिसके कारण वे जिन साधनों का उपयोग करते है उन पर मेरी आपत्ति है, उनके उद्देश्य केवल बुरे उद्देश्य हैं। पाप की संकल्पा के कारण मनुष्य सुख से वंचित रहता है। अपने शरीर से तिरस्कृत रहता है, अपना जीवन जहरीला और कलंकित बनाता है तथा अपने-आपको गिरा हुआ और कलुषित मानता है। परिणामस्वरूप, उसके साधन भी बुरे हैं। मेरी भावनाएं इसके बिल्कुल विपरीत हैं। जब मैं मनु का विधान पढ़ता हूं, जो निश्चित ही एक अतुलनीय, अपूर्व बौद्धिक तथा श्रेष्ठ कलाकृति है, उसका बाइबिल के साथ उल्लेख करना भी एक भारी पाप होगा। आप तुरंत जान सकते है, ऐसा क्यों? क्योंकि उसमें, उसकी पृष्ठभूमि में एक सच्चा दर्शन है। उसमें केवल ज्यू लोगों के रब्बिनवाद की गंध वाले सार और वहम नहीं हैं, उसमें बड़े-बड़े तुनक मिजाज मनौवैज्ञानिक की बुद्धि के लिए भी भरपूर सामग्री है और अत्यधिक महत्वपूर्ण तथा न भूलने वाली बात यह है कि मनु का विधान मौलिक रूप से बाइबिल से सभी प्रकार से भिन्न है, उसके कारण समाज के प्रतिष्ठित वर्ग, दार्शनिक और योद्धा जनता की रक्षा करते हैं और उनका मार्गदर्शन करते हैं। वह महान आदर्शों से ओत-प्रोत है। वह परिपूर्णता की भावना से भरा हुआ है उसमें जीवन का सार है और अपने स्वयं के प्रति तथा जीवन के प्रति कल्याण की विजयी भावना है। उस संपूर्ण ग्रंथ पर सूर्य की जगमगाहट है। वह प्रजोत्पादन, स्त्री, विवाह आदि सभी बातों को जिन्हें इसाई धर्म अपनी गहरी अश्लीलता से दबा देता है, यहां ईमानदारी, आदर, प्रेम तथा विश्वास के साथ प्रस्तुत किया गया है।