हिंदुत्व का दर्शन
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की गतिविधियों की जानकारी दी है। वे संपूर्ण रूप से अपनी आजीविका अपराधों से ही पूरी करते हैं। उनमें से कुछ लोग प्रकट रूप से खेती करते हैं। पंरतु यह केवल उनका सही व्यवसाय छुपाने के लिए ही है। हम उनकी बहुत-सी दुष्ट प्रथाएं, उनके द्वारा किए जाने वाली हिंसात्मक चोरी अथवा डकैती में देख सकते हैं। परंतु अपराध करने के लिए ही संगठित होने वाली जाति होने के कारण, उन्हें इन बातों में कुछ भी अनुचित नहीं लगता, किसी भी विशेष बस्ती में जब कोई डकैती डालना निश्चित हो जाता है, तब उचित शिकार का पता करने के लिए जासूस भेजे जाते है, ग्रामवासियों की आदतों का अध्ययन किया जाता है और साथ ही किसी अन्य गांव से कारगर सहायता प्राप्त करने की संभावना के लिए उस गांव की दूरी और वहां के लोगों की तथा हथियारों की संख्या आदि सभी बातों की जानकारी प्राप्त की जाती है। डकैती प्रायः मध्य रात्रि में होती है। जासूसों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर गांव के विभिन्न स्थानों पर लोग नियुक्त किए जाते हैं और ये लोग अपने हथियार चलाकर उनकी मुख्य टोली से लोगों का ध्यान दूसरी ओर आकर्षित करते हैं। तब यह मुख्य टोली उस विशेष पूर्व निर्धारित मकान अथवा मकानों पर हमला करती हैं। यह टोली बहुधा तीस अथवा चालीस आदमियों की होती है।
इन लोगों के सामान्य जन-जीवन में अपराध को महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, उस पर बल देना आवश्यक है। एक बच्चा जब चलने-फिरने तथा बोलचाल के योग्य हो जाता है, तभी से उसे अपराधी जीवन की दीक्षा दी जाती है। निस्संदेह इसके पीछे काफी हद तक एक वास्तविक उद्देश्य होता है कि बच्चे के लिए छोटी-छोटी चोरियां करने के लिए जोखिम उठाना अच्छा होता है, क्योंकि यदि वह बच्चा पकड़ा जाता है तब शायद उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है। इस कार्य में औरतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जो यद्यपि वास्तविक रूप से डकैती में भाग नहीं लेतीं परंतु अनेक भारी जिम्मेदारियां निभाती हैं। चोरी का माल बेचने में बहुत चतुर होने के साथ-साथ अपराधी जातियों की यह औरतें दुकानों में रखी हुई वस्तुएं चुराने के कार्य में अति कुशल मानी जाती हैं।
किसी समय पिंडारी तथा ठग जैसे अनेक व्यावसायिक सुसंगठित संगठनों का इन अपराधी जातियों में समावेश होता था।
पिंडारी शस्त्रधारी लुटेरे का एक हिंसक संगठन था। उनका संगठन लुटरों का एक मुक्त सैनिक शस्त्रधारी संगठन था, जो बीस हजार और उससे भी अधिक अच्छे घोड़े एक समय पर रखते थे। वे एक डाकू मुखिया की आज्ञा में रहते थे। उनमें से बहुत शक्तिशाली लुटेरे चित्त नाम के एक मुखिया के पास दस हजार घोड़े थे जिनमें पांच हजार उत्तम घुड़सवार और उसके साथ ही पैदल सेना तथा बंदूकें होती थीं। पिंडारी लोगों के पास ऐसी कोई सैनिक योजना नहीं थी जिसके तहत वे अपने अनियमित