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हिंदू समाज-व्यवस्थाः इसके मूलभूत सिद्धांत

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पैदा किया है। दूसरा भाग यह है कि ईश्वर ने अपने दैवी शरीर के भिन्न-भिन्न भागों से भिन्न-भिन्न वर्ण के लोगों को पैदा किया है। हिंदू पहले भाग की तुलना में दूसरे भाग को अधिक महत्वपूर्ण तथा अधिक मौलिक मानते हैं।

हिंदू समाज व्यवस्था इस सिद्धांत पर आधारित है कि ईश्वर ने मानव को अपने शरीर के भिन्न-भिन्न हिस्सों से पैदा किया है, अतः पाल या पवित्र स्थानों की यात्रा करने वाले पादरियों द्वारा व्यक्त किए गए विचारों का इसमें कोई स्थान नहीं है। ब्राह्मण, क्षत्रिय ईश्वर की भुजाओं से पैदा हुआ है। क्षत्रिय, वैश्य का भाई नहीं है क्योंकि क्षत्रिय ईश्वर की भुजाओं तथा वैश्य उसकी जंघा से पैदा हुआ है। चूंकि कोई किसी का भाई नहीं है, अतः कोई किसी का रक्षक नहीं है।

इस सिद्धांत ने, कि भिन्न-भिन्न वर्ण ईश्वर के भिन्न-भिन्न अंगों से पैदा हुए हैं, इस विश्वास को पैदा किया है कि यह ईश्वरीय इच्छा है कि वे सभी वर्ण अलग-अलग रहें तथा अपनी अलग-अलग पहचान बनाए रखें। इसी विश्वास ने हिंदुओं में अलग-अलग रहने तथा अपने शेष साथी हिंदुओं से भिन्न, विशिष्ट पहचान बनाए रखने की भावना को बल दिया है। मनुस्मृति के उपनयन या यज्ञोपवीत पहनने के निमंकित निमयोंं की तुलना कीजिएः

2.36 ब्राह्मण-बालाक का गर्भ से आठवें वर्ष में, क्षत्रिय-बालक का गर्भ

से ग्यारहवें वर्ष में और वैश्य-बालक का गर्भ से बारहवें वर्ष उपनयन

(यज्ञोपवीत) संस्कार कराएं।

2.41 ब्रह्मचारी अपनी जाति के अनुसार शरीर के ऊपरी भाग पर कृष्णमृग

चित करते मृत तथा बकरे की खाल शरीर के निचले भाग पर सन, क्षौम

या ऊन के बने वस्त्र पहने।

2.42 ब्राह्मण की मेखला में तीन गाठें मूंगा घास के तीन धागों से और

चिकनी व मुलायम, क्षत्रिय की मेखला मुर्वा धागे की तथा वैश्य की मेखला

सन के धागों की बनी होनी चाहिए।

2.43 यदि मूंंगा घास आदि प्राप्त न हो, तो (मेखला) कुश अश्मंतक तथा

बल्वज (रेशों) की बनाई जा सकती है जिसमें (परिवार की रीति-रिवाज के

अनुसार) एकल तिहरी गांठ या तीन या पांच गांठें लगाई जा सकती हैं।

2.44 ब्राह्मण का यज्ञोपवीत रूई का, क्षत्रिय का यज्ञोपवीत सन के धागों

का तथा वैश्य का यज्ञोपवीत ऊनी धागों का ऊपर की ओर से बंटा हुआ

तीन लड़ी का होना चाहिए।

2.45 पवित्र विधान के अनुसार ब्राह्मण को बेल या पलाश का, क्षत्रिय को बट

या खैर का तथा वैश्य को पीलु या गूलर का दंड धारण करना चाहिए।