2. हिंदू समाज व्यवस्था : इसके मूलभूत सिद्धांत - Page 135

120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

गोल नहीं दिया गया है) को अपने को गोल द्वारा बिरादरी से बाहर कर दिया

था और जब कि यह मामला न्यायालय में विचारधीन था, जैसवाल चौधरी ने

गलती से उसे रात के भोजन पर बुला लिया। इस पर तीनों गोलों ने एक साथ

मिलकर चौधरी पर 30 रुपए का दंड लगा दिया। अंत में दंड की राशि एकत्रित

की गई और यह निर्णय लिया गया कि कथा कराई जाए। दलमु चौधरी ने कहा

कि वह तो अपना हिस्सा नकद लेगा। लेकिन मानिकपुर चौधरी (जसके पास

संयुक्त राशि जमा थी) ने इससे असहमति व्यक्त करते हुए वह रवैया अपनाया

कि जो कथा होने जा रही है, उसमें दलमु लोग यदि चाहें तो आ सकते हैं,

और न चाहें तो न आएं। इस स्तर पर इस मामले को न्यायालय में ले जाया

गया, इसी बीच तीनों गोलों ने एक दूसरे के साथ-शादी विवाह करना बंद कर

दिया। इन झगड़ों के कारण सगोत्र शादी-विवाह होने वाली उपजाति तीन समूहों

में बंट गई और एक गोल दूसरे गोल के खिलाफ हो गया।

यदि किसी जाति का कोई समूह पूजा का कोई नया या असामान्य माध्यम अपनाता है, जिसे उसकी बिरादरी के अन्य सदस्य मान्यता नहीं देते, तो वह गुट टूट जाएगा और एक संगोत्र उपजाति बन जाएगी। यदि कुछ उपजातियां देखने में नहीं आती हैं तो इसका कारण उनकी सहिष्णुता है कि वह किसके साथ रोटी-बेटी का व्यवहार करते है तथापि हम पाएंगे कि तेली तथा कोरी जातियों में महाभीर व पंचप्रिय और बढ़ई, भंगी तथा खडेरा जातियों में नमकशाली उपजातियां पाई जाती हैं।’’

ये जातियां एक दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करती हैं, इनका मूल मंत्र है कि अलग-अलग रहो’, ‘एक दूसरे के साथ विवाद न करो’, ‘एक दूसरे के साथ खान-पान न करो’ तथा ‘एक-दूसरे को न छुओ’। श्री ब्लंट ने इस स्थिति का बहुत ही मार्मिक वर्ण किया है। वह कहते हैंः

‘‘एक हिंदू या तो अकेला खाना खाता है, या फिर अपनी बिरादरी के लोगों

के साथ खाता हैं। स्त्रियां पुरुषों के साथ खाना नहीं खा सकतीं। वे तब

तक इंतजार करती हैं, जब तक कि उनके पति खाना समाप्त नहीं कर लेते।

जहां तक खाने या खाने के किसी भाग में कच्चा खाना (यह हमेशा होता

है क्योंकि हर खाने में चपाती होती है) शामिल होता है, तो ऐसे में आदमी

को बड़े मंत्रोपचार जैसे एतिहायती कदमों के साथ भोजन करना पड़ता है।

वह जमीन पर अपने चारों तरफ चौकोर लकीर खींचकर (चौका) बैठता है,

जिसके अंदर चूल्हा या खाना बनाने का स्थान होता है। यदि किसी अजनबी

की छाया भी ऐसे स्थान पर पड़ जाती है, तो सारा पका-पकाया खाना झूठा

हो जाता है और उसे फेंक दिया जाता है। एक ही समूह में हिंदू सेवकों को

एक-दूसरे से अलग-अलग अपने-अपने चौके में मिट्टी के चूल्हों पर अपना