122 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ऐसे मनोविकारों पर आधारित समाज-व्यवस्था में भाई-चारा कैसे हो सकता है? भाई-चारे की भावना तो दूर की बात है, जातियों के आपसी संबंध भी भ्रात-हत्या जैसे हैं। वर्ग-चेतना, वर्ग-संघर्ष तथा वर्ग-युद्ध जैसी विचारधारा के बारे में माना जाता है कि यह कार्लमार्क्स के लेखन से अस्तित्व में आई। यह एक भारी गलती है। भारत वह देश है, जिसने वर्ग-संघर्ष का वास्तविक अनुभव किया है। भारत वह भूमि है, जहां ब्राह्मणों व क्षत्रियों ख्2, के बीच वर्ग-युद्ध हुआ है, जो कई पीढि़यों तक चला है और इतनी कटुता के साथ लड़ा गया कि इससे समूलनाश-युद्ध का वातावरण ही बन गया था।
यह नहीं माना जाना चाहिए कि भाई द्वारा भाई की हत्या करने की भावना ने भाईचारे की भावना को जन्म दिया है। हिंदू समाज-व्यवस्था में पृथक्करण की ठीक वही भावना आज भी देखी जा सकती है, जो कि निम्न विवरण से स्पष्ट हैः
प्रत्येक वर्ग अपनी अलग-अलग व पृथक उत्पत्ति का दावा करता है। कुछ यह दावा करते हैं कि वे अमुक ऋषि या अमुक योद्धा की संतान हैं लेकिन हरेक मामले में ऋषि या नायक भिन्न होता है, जिसका दूसरी जातियों के जनक कहे जाने वाले अन्य ऋषियों या नायकों से कोई संबंध नहीं होता। प्रत्येक जाति इस बात का ध्यान रखती है कि वह अपने को दूसरी जाति से श्रेष्ठ सिद्ध करे। इसका सही चित्रण अतिसहभोजता के नियमों तथा अतिसंगम के नियमों द्वारा किया गया है। जैसा कि श्री ब्लंट ने कहा हैः
‘‘यह जानना आवश्यक है कि खान-पान के संबंध में रसोइए की जाति
पक्का मापदंड है। मेजबान कोई भी हो सकता है। अतः यह स्वाभाविक है
कि उच्च जाति का हिंदू किसी भी जाति के व्यक्ति का खाना खा सकता
है, बशर्ते मेजबान का रसोइया उपयुक्त जाति का हो और यही कारण है कि
अनेक रसोइए ब्राह्मण हैं। हिंदू कच्चा खाना, जो कि पानी से बनाया जाता
है तथा पक्का खाना जो कि घी में बनाया जाता है, के बीच अंतर करता
है। यह अंतर इस सिद्धांत पर आधारित है कि गाय का घी शुद्ध पदार्थ है,
इसलिए अशुद्ध की आशंका नहीं रहती। इसीलिए इस सुविधाजनक मान्यता के
कारण हिंदू कच्चे खाने की अपेक्षा पक्के खाने के मामले में कम रूढि़वादी
होता है और तदनुसार अपने प्रतिबंधों को सीमित करता है।’’
- उत्तरी भारत में साथ-साथ खाने पर केवल तभी निषेध है, जब भोजन कच्चा होता है। लेकिन दक्षिण
भारत में यह निषेध पूरी तरह है, चाहे भोजन पक्का भी क्यों न हो। कच्चा भोजन पानी से, पक्का घी
में बनाया जाता है।
देखिए, मेरी पुस्तक-हू वर दि शुद्राज
दि कास्ट सिस्टम आफ नर्दन इंडिया, पृ. 89-90