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हिंदू समाज-व्यवस्थाः इसके मूलभूत सिद्धांत

निकट संबंधों के बारे में श्री ब्लंट कहते हैं ख्1, ः

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‘‘निकट संबंधों की परंपरा के कारण कई जातियों के शादी व्यवहार में

महत्वपूर्ण परिवर्तन होता है। जहां यह लागू होता है, वहां विजातीय विवाह

संबंधी समूहों को उनके सामाजिक स्तर के अनुसार वर्गीकृत किया जाता

है, लेकिन देता नहीं है। यह नियम राजदूतों के बीच बहुत ज्यादा प्रचलित

है। लेकिन कई अन्य जातियों द्वारा भी इनका पालन किया जाता है.....।

वास्तव में लगभग सभी हिंदुओं के बीच अति-संकीर्णता की प्रवृत्ति पाई

जाती है।’’

संकीर्णता के आधार पर खान-पान और संबंधों में इन नियमों के पीछे क्या चीज रही है? इसके पीछे छोटे-बड़े की भावना के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। सभी जातियां इस भावना से ग्रस्त हैं और कोई भी जाति ऐसी नहीं है जो इससे मुक्त हो। हिंदू समाज-व्यवस्था जातियों की एक सीढ़ी है, जिसमें एक के ऊपर एक को रखा गया है यह ऐसी तराजू है, जिसमें घृणा का पलड़ा भारी से भारी होता जाएगा।

यह भावना एक जाति द्वारा दूसरी जाति पर कटाक्ष करने के उद्देश्य से बनाई गई कहावतों में परिलक्षित होता है। इसने निम्न जाति के लेखकों को अपने साहित्य में यह सुझाव देने को भी प्रेरित किया है कि तथाकथित उच्च जाति का उद्भव घटिया व शर्मनाक हैं, सहयाद्रि खड़ इसका सबसे बढि़या उदाहरण है। यह एक पुराण है जो कि अपनी शैली में अन्य परपंरागत पुराणों से भिन्न हैं इसमें भिन्न-भिन्न जातियों के बारे में वर्णन मिलता है। ऐसा करते समय इसमें अन्य जातियों की उत्पत्ति को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है। किन्तु ब्राह्मण जाति की उत्पत्ति को घृणित बताया है इसका उत्तर नकारात्मक है। यह सिद्धांत कि आदमी स्वतंत्र पैदा होता है, हिंदू समाज-व्यवस्था के खिलाफ हैं। यह समाज आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इस सिद्धांत को गलत मानता है हिंदू समाज-व्यवस्था के अनुसार हालांकि यह सही है कि सभी मनुष्य इस ब्राह्मांड के सृजक प्रजापति की संतान है, पर वे समान नहीं हैं, क्योंकि वे प्रजापति के शरीर के भिन्न-भिन्न अंगों से पैदा हुए हैं। ब्राह्मण उनके मुंह से, क्षत्रिय उनकी भुजाओं से, वैश्य उनकी जंघा से तथा शूद्र उनके पैरों से पैदा हुए हैं। जिन अंगों से वे पैदा हुए हैं, वे अंग असमान महत्व रखते हैं, इसलिए आंखों के द्वारा पैदा किए गए मनुष्य भी असमान हैं। जीव-विज्ञान के दृष्टिकोण से हिंदू समाज-व्यवस्था यह परवाह नहीं करती कि वह इस सिद्धांत की जांच कराए कि क्या वह तथ्य पर आधारित हैं उन्होंने यह जानने की चेष्टा नहीं की कि प्रत्येक

  1. दि कास्ट सिस्टम आफ नर्दन इंडिया,