138 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मनु कहता हैः
8.379 पुरोहित वर्ग के व्याभिचारी को प्राण-दंड देने के बजाय उसका
अपकीर्ति कर मुंडन करा देना चाहिए तथा इसी अपराध के लिए अन्य वर्गों
को मृत्यु-दंड तक दिया जाए।
8.380 राजा समस्त पाप करने वाले ब्राह्मण का वध कभी न करे, किंतु
संपूर्ण धन के साथ अक्षत उसको राज्य से निर्वासित कर दे।
11.127 बिना द्वेष-भाव के यदि ब्राह्मण किसी सदाचारी क्षत्रिय की हत्या
कर देता है, तो उसे उसके सभी धार्मिक संस्कारों को रोकने के बाद पुरोहित
को एक बैल और एक हजार गाय देनी चाहिए।
11.128 अर्थात् संयमी और जटाधारी होकर ग्राम से अधिक दूर पेड़ के नीचे
निवास करता हुआ तीन वर्ष तक ब्रह्मा की हत्या के प्रायश्चित को करे।
11.129 सदाचारी वैश्य का बिना कारण वध करने वाला ब्राह्मण इसी
प्रायश्चित को एक साल तक करे अथवा एक बैल के साथ सौ गायों को
पुरोहित को दे।
11.130 बिना इरादे के शूद्र का वध करने वाला ब्राह्मण छह मास तक इसी
व्रत को करे अथवा एक बैल और दस सफेद गाय पुरोहित को दे।
8.381 ब्राह्मण वध के समान पृथ्वी पर दूसरा कोई बड़ा पाप नहीं है, अतएव
राजा मन से भी ब्राह्मण के वध करने का विचार न करे।
8.126 एक ही प्रकार के बार-बार होने वाले अपराधों पर विचार करते हुए
और उसका स्थान तथा समय निश्चित करते हुए अपराधी को दंड देने की
अथवा सजा भुगतने की पात्रता को देखते हुए राजा को केवल उन लोगों को
ही सजा देनी चाहिए जो उसके लिए पात्र हैं।
8.124 ब्रह्मा के पुत्र मन ने तीन कनिष्ठ वर्णों के विषय दंड के दस स्थानों
को कहा है और ब्राह्मण को पीड़ारहित अर्थात् बिना किसी प्रकार दंडित
किए केवल राज्य से निकाल दिया जाता है।
मनुस्मृति ब्राह्मण को अन्य विशेषाधिकार भी देती है। जहां तक शादी का प्रश्न है, वह अपने ही वर्ग की महिला के साथ शादी करने के अतिरिक्त अपने से भिन्न किसी भी वर्ग की महिला के साथ विवाह संबंध स्थापित कर सकता है ख्1, लेकिन वह उसके साथ शादी करने या उसके बच्चों को अपना पद या अपनी संपत्ति का कोई अधिकार देने के लिए बाध्य नहीं होगा। उसे अपने साथ ज्यादती करने वाले को दंड