हिंदू समाज-व्यवस्थाः इसकी अनोखी विशेषताएं
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11.32 उसकी निजी शक्ति जो केवल उसी पर निर्भर करती है, राजकीय
शक्ति से प्रबल होती है जो कि दूसरे व्यक्तियों पर निर्भर हैं। अतः ब्राह्मण
अपनी शक्ति के द्वारा ही अपने शत्रुओं का दमन कर सकता है।
11.33 ब्राह्मण अपने वेद के आंगिरस श्रुति को बिना विचारे ही प्रयोग कर सकता
है क्योंकि ब्राह्मण का वचन ही शास्त्र है, अतएव उससे ब्राह्मण शत्रुनाश करें।
9.320 यदि कोई क्षत्रिय ब्राह्मण के विरुद्ध सभी अवसरों पर हिंसक ढंग
से शस्त्र उठाता है, तो उसे स्वयं वह ब्राह्मण ही दंड देगा, क्योंकि क्षत्रिय
मूल रूप से ब्राह्मण से ही पैदा हुआ है।
जब तक ब्राह्मण हथियार का सहारा नहीं लेते, तब तक क्षत्रियों को कैसे दंडित कर सकते हैं? मनु जानता है और इसलिए वह ब्राह्मण को स्वयं हथियार उठाने के लिए अनुमति देता है, ताकि क्षत्रियों को दंडित किया जा सके।
12.100 सेना पर नियंत्रण, राजकीय प्राधिकर, दंड देने की शक्ति तथा सभी
राष्ट्रों के ऊपर प्रभुसत्ता-राज्य का केवल वही अधिकारी है जो वेद-शास्त्र
का पूर्ण ज्ञाता है, अर्थात् वह ब्राह्मण है।
स्थापित व्यवस्था के अनुरक्षण तथा परिरक्षण का दूसरा तरीका पहली तरकीब से बिल्कुल भिन्न है । वास्तव में यही वह तकनीक है, जो हिंदू समाज-व्यवस्था की अलग विशेषता है।
हिंसक आक्रमण से समाज-व्यवस्था के परिरक्षण के दृष्टिकोण से तीन बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है क्रांति के लिए तीन कारक उत्तरदायी होते हैंः (1) न्यायविरुद्ध एहसास की उपस्थिति, (2) यह जानने की क्षमता कि व्यक्ति विशेष के साथ अनुचित व्यवहार किया जा रहा है, तथा (3) हथियारों की उपलब्धता। दूसरी बात यह कि विद्रोह को भड़कने ही न दिया जाए और यह कि विद्रोह के भड़कने के बाद उसे दबाया जाए। तीसरी बात यह कि क्या विद्राह को रोका जाना संभव है या विद्रोह को दबाने का तरीका ही शेष है_ यह उन नियमों पर निर्भर करता है, जो विद्रोह की आशंकाओं का संकेत करते हैं।
जब सामाजिक प्रणाली उन्नति के अवसर को रोकती है, शिक्षा तथा हथियार उठाने के अधिकार से वंचित करती है, जो इसका मतलब है कि यह समाज-व्यवस्था के विरुद्ध विद्रोह को दबाने की स्थिति में हैं जबकि दूसरी ओर समाज-व्यवस्था शिक्षा के अधिकार को अनुमति देती है और हथियारों के उपयोग को मान्यता देती है, यह उनके द्वारा विद्रोह को नहीं दबा सकती जो अनिष्ट के शिकार होते हैं। समाज-व्यवस्था को संरक्षित रखने में पहली विधि को अपनाया गया है। इसने भावी पीढि़यों के लिए निम्न वर्गों की सामाजिक स्थिति निर्धारित कर दी है इनके आर्थिक स्तर को भी