152 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अंशदान देने से छूट दे दी जाती है। दूसरी जाति कृषकों की है जो बहुसंख्य है तथा अत्यधिक मृदृल तथा सरल स्वभाव के होते हैं। उन्हें सैन्य सेवा से छूट दी जाती है और वे निर्भय होकर अपनी जमीनों को जोतते हैं। वे कभी भी शहर, कस्बे में उसके उपद्रवों में भाग लेने या किसी अन्य उद्देश्य से नहीं जाते। अतः कई बार ऐसा होता है कि एक ही समय तथा देश के एक ही भाग में कुछ लोग युद्ध में रत दिखाई देते हैं और अपने जीवन को जोखिम में डालकर लड़ते हैं। जबकि दूसरी ओर उनके पास में ही रहने वाले लोग निश्चित होकर हल चला रहे होते हैं तथा निराई-गुड़ाई कर रहे होते हैं, क्योंकि उनकी रक्षा के लिए ये सैनिक वर्ग है ही। समस्त भूमि राजा की संपत्ति होती है तथा कृषक उस पर खेती इस शर्त पर करते हैं कि उनको फसल का एक चौथाई भाग मिलेगा।
तीसरी जाति पशुपालकों तथा शिकारियों की है केवल वे ही शिकार कर सकते हैं, पशु पाल सकते हैं, भारवाही पशुओं को बेच सकते हैं। या उन्हें किराए पर दे सकते हैं। खेत में बोए हुए बीजों को चट कर जाने वाले जंगली जानवरों से भूमि को साफ करने के बदले उन्हें राजा की ओर से भत्ते के रूप में अनाज दिया जाता है। वे घुमक्कड़ जीवन व्यतीत करते हैं तथा डेरों में रहते हैं। पशुपालकों तथा शिकारियों के बाद चौथा वर्ग वह है, जिसमें व्यापारी शामिल हैं, जो बर्तन बेचते हैं और शारीरिक श्रम करते हैं। इनमें से कुछ कर देते हैं तथा राज्य को कतिपय निर्धारित सेवाएं प्रदान करते हैं। लेकिन हथियार-निर्माता तथा जहाज बनाने वाले राजा से मजदूरी तथा खाद्य सामग्री प्राप्त करते हैं, क्योंकि वे मात्र उन्हीं के लिए कार्य करते हैं। सेनानायक सैनिकों को हथियारों की आपूर्ति करता है तथा नौसेनानायक यात्रियों तथा वाणिज्यिक वस्तुओं, दोनों के परिवहन के लिए जहाजों को किराए पर देता है। पांचवा वर्ग सैनिकों का है, जो सक्रिया सेवा में न लगे होने पर अपना समय केवल खाने-पीने में ही व्यतीत करते हैं उन पर राजा की ओर से व्यय किया जाता है, अतः आवश्यकता पड़ने पर वे सदैव लड़ने को तैयार रहते हैं, क्योंकि उनके पास उनके शरीरों के अलावा और कुछ भी नहीं होता। छठा वर्ग भेदियों का है, जिन्हें यह कार्य सौंपा जाता है कि जो कुछ भी हो रहा है, उस पर निगरानी रखें तथा राजा को गुप्त रूप से सूचित करें। कुछ को शहर में सतर्कता का तो कुछ को सेना के निरीक्षण का कार्य सौंपा जाता है। पहले वाले शहर की वेश्याओं को अपने सहायक के रूप में नौकरी पर रखते हैं तथा दूसरे वाले कैम्प की वेश्याओं को अपने सहायक के रूप में नौकरी पर रखते हैं तथा दूसरे वाले कैम्प की वेश्याओं को अपना सहायक बनाते हैं। इन