1. हिंदुत्व के प्रतीक - Page 168

हिंदुत्व के प्रतीक

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पदों पर योग्यतम तथा सर्वाधिक विश्वासपात्र व्यक्तियों को बिठाया जाता है। सातवें वर्ग में रात के पार्षद तथा कर-निर्धारक शामिल हैं। इनको उच्चतम सरकारी पद न्यायालय तथा जन-सामान्य के कार्यों का शासन-कार्य सौंपा जाता है। किसी को भी अपनी जाति से बाहर शादी करने या अपना व्यवसाय या वाणिज्य बदलने या एक से अधिक धंधा करने की अनुमति नहीं होती। केवल दार्शनिक ही इसका अपवाद होता है क्योंकि उनके गुणों के कारण उन्हें यह विशेषाधिकार दिया जाता है।’’

लगभग 1030 ईस्वी में भारत की अपनी यात्रा का विवरण देते हुए अलबरूनी को भी हिंदू समाज-संगठन के अजूबों ने आकर्षित किया होगा, क्योंकि उन्होंने भी अपने अनुभवों को दर्ज करते समय इस बात को भी भुलाया। वह लिखता हैः ‘‘हिंदू अपनी जातियों को वर्ण अर्थात् रंग कहते हैं और जन्म के आधार पर उन्हें जातक अर्थात् जन्म कहते हैं। शुरू से ही ये जातियां केवल चार हैं।

  1. ब्राह्मण सबसे ऊंची जाति के है, जिनके बारे में हिंदुओं की पुस्तकों से पता चलता है कि वे ब्रह्मा के मुख से पैदा हुए थे और ब्रह्मा उस शक्ति का दूसरा नाम है जिसे प्रकृति कहते हैं तथा सिर जीवधारी के शरीर का सर्वोत्तम भाग होता है_ अतः ब्राह्मण संपूर्ण जाति के श्रेष्ठ अंग हैं। हिंदू उन्हें सर्वोत्तम मानव मानते हैं।

  2. अगली जाति क्षत्रियों की है, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे ब्रह्मा के कंधों तथा हाथों से पैदा हुए थे। उनका पद ब्राह्मण के पद से ज्यादा नीचा नहीं है।

  3. उनके बाद वैश्य है, जो ब्रह्मा की जंघाओं से पैदा हुए।

  4. शूद्र चौथे नम्बर पर आते हैं, जो ब्रह्मा के पैरों से पैदा हुए। बाद के दोनों वर्गों के बीच ज्यादा अंतर नहीं है तथापि ये वर्ग एक-दूसरे से भिन्न है और वे एक ही कस्बे तथा गांवों में रहते हैं तथा उनके निवास-स्थान एक-दूसरे के घुले-मिले होते हैं।

शूद्र के बाद अन्त्यज आते हैं, जो विभिन्न प्रकार की सेवाएं करते हैं तथा जिन्हें किसी भी जाति में नहीं गिना जाता, बस उन्हें किसी विशेष शिल्प या व्यवसाय का सदस्य ही माना जाता है। धोबी, मोची तथ जुलाहे को छोड़कर उनमें आठ वर्ग ऐसे हैं जो एक-दूसरे के साथ शादी-विवाह कर सकते हैं क्योंकि कोई अन्य उनके संबंध रखने को तैयार नहीं होता। ये आठ वर्ग हैं। - धोबी (रजक), मोची, वाजीगर, टोकरी तथा ढाल बनाने वाला, नाविक (मल्लाह), मछुआरा, जंगली जानवरों तथा चिडि़यों का शिकारी तथा जुलाहा।