1. हिंदुत्व के प्रतीक - Page 169

154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इनकी बस्तियां चारों वर्णों के लोगों की बस्तियों के समीप नहीं होती हैं। ये लोग गांवों तथा कस्बों के बाहर बसे होते हैं।

हादी, डोम, चांडाल तथा बधातो नामक लोगों को किसी भी जाति या वर्ग में नहीं गिना जाता। वे गांवों की सफाई तथा अन्य सेवाओं-जैसे गंदे कार्यों में लगे रहते हैं। उन्हें केवल एक अनन्य वर्ग माना जाता है। वास्तव में उन्हें अवैध बच्चों की तरह माना जाता है_ क्योंकि सामान्य धारणा यह है कि व्यभिचार से पैदा हुए बच्चों के रूप में उनका पिता शूद्र तथा माता ब्राह्मणी होती है, अतः वे बिरादरी से निकाले गए पतित होते हैं।

हिंदू चारों जातियों के प्रत्येक व्यक्ति को उनके व्यवसाय तथा धंधों के अनुसर विशिष्ट नाम देते हैं, जैसे सामान्य तौर पर ब्राह्मण को जब तक वह घर पर रह कर अपना काम करता है, ब्राह्मण नाम से पुकारा जाता है। जब वह एक अग्नि की सेवा करता है तो उसे इश्तिन कहते हैं_ यदि वह तीन अग्नियों की सेवा करता है तो उसे अग्निहोत्री कहते हैं, यदि वह इनके अतिरिक्त अग्नि को आहुति देता है तो उसे दीक्षित कहते हैं और चूंकि ऐसा ब्राह्मण के साथ है, इसलिए अन्य के साथ भी ऐसा ही है। नीची जातियों के अंतर्गत हादी का स्थान ऊंचा है क्योंकि वे स्वयं को गंदे कर्मों से दूर रखते हैं। दूसरे क्रम में डोम होते हैं जो सारंगी बजाते हैं और गाते हैं। उनसे भी निम्नतम वर्ग बधिकों तथा जल्लादों का है। सबसे बुरे बधान्तन होते हैं, जो न केवल मरे हुए जानवरों का मांस खाते हैं, बल्कि कुत्ते तथा अन्य जानवरों का भी मांस खाते हैं।

चारों जातियों में प्रत्येक जाति के लोग अपनी बिरादरी के साथ मिलकर ही

खाना खाते हैं। भिन्न जातियों के दो व्यक्तियों के साथ-साथ खान-पान नहीं होता। यदि किसी ब्राह्मण के समूह में ऐसे दो व्यक्ति हैं जो एक-दूसरे के शत्रु है और वे एक-दुसरे के पास बैठ गए हैं तो वे दोनों अपने आसनों के बीच तख्ती रखकर या कपड़े का टुकड़ा रखकर या किसी अन्य तरीके से बाड़ बना लेते हैं और उनके बीच यदि मात्र कोई रेखा ही खींची होती है तो उन्हें अलग-अलग माना जाता है। चूंकि किसी के बचे हुए भोजन को खाना निषिद्ध है, इसलिए हरेक अकेले व्यक्ति को स्वयं के लिए अपना खाना रखना पड़ता है, क्योंकि खाना खाने वाले दल के प्रत्येक व्यक्ति को एक ही थाली से

खाना लेना होता है, अतः पहले व्यक्ति द्वारा खा चुकने के बाद जो कुछ भी उस थाली से बच जाता है, वह दूसरी बार खाने वाले व्यक्ति के लिए जूठन माना जाता है, जिसे खाना निषिद्ध है।’’