1. हिंदुत्व के प्रतीक - Page 170

हिंदुत्व के प्रतीक

155

अलबरूनी ने केवल वहीं तक स्वयं को सीमित नहीं रखा जहां तक उसे हिंदू समाज-संगठन ने आकर्षित किया, बल्कि उसने यहां तक कहाः

‘‘हिंदुओं में ऐस समाज बहुत हैं। मुसलमान इनसे बिल्कुल अलग हैं, सभी

व्यक्तियों को समान मानते है, केवल धर्मपरायणता को छोड़कर हिंदू और

मुसलमानों के बीच मेल-जोल, स्थायित्व होने में यही सबसे बड़ी बाधा है।’’

1500 ई. से 1571 ई. तक भारत में पुर्तगाली सरकार की सेवारत एक पुर्तगाली अधिकारी के बारे में अपने अनुभव को दर्ज किया है। गुजरात राज्य के बारे में वह कहता हैः

‘‘बीढ़ के हाथों में गुजरात राज्य के आने के पहले मूर्ति-पूजकों की एक

विशेष जाति जिसे बीढ़ राजपूत कहते थे, यहां रहते थे, जो उन दिनों इस

देश के सरदार तथा रक्षक हुआ करते थे तथा आवश्यकतानुसार युद्ध किया

करते थे। ये लोग भेड़ तथा मछलियों को मारकर तथा अन्य सभी प्रकार

की खाद्य सामग्री खाते हैं। पहाड़ों में अब भी इनमें से बहुत से है जहां

अब भी इनके बहुत बड़े-बड़े गांव हैं और वे गुजरात के राजा की आज्ञा

का उल्लंघन ही नहीं करते वरन् वे उसके खिलाफ रोजाना युद्ध करते हैं_

राजा उनके विरुद्ध डटे रहने में अब भी सक्षम नहीं हैं क्योंकि वे बहुत

अच्छे घुड़सवार - धनुर्धर होते हैं और बीढ़ी से अपना रक्षा करने के लिए

अनेक प्रकार के हथियार रखते हैं, जिनके आधार पर वे लगातार युद्ध

करते रहते हैं_ फिर भी न तो कोई उनका राजा होता और न ही उनका

कोई मालिक। और इसी राज्य में एक अन्य प्रकार से मूर्ति-पूजक हैं जिन्हें

बनियां कहते हैं, (जो बहुत बड़े व्यापारी हैं) वे बीढ़ी के साथ रहते हैं

और अपना व्यापार उन्हीं के साथ करते हैं। ये लोग न तो मांस खाते हैं न

मछली खाते हैं और न ही कोई ऐसी अन्य चीज खाते हैं जो मर सकती

है, वे किसी की हत्या नहीं करते न ही वे किसी जानवर की हत्या देखना

पसंद करते हैं_ और इस प्रकार वे अपनी मूर्ति-पूजा जारी रखते हैं तथा

इसे पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं, और आश्चर्य की चीज होती है अक्सर

ऐसा होता है कि बीढ़ उनके पास जीवित कीड़े-मकोड़े या छोटे-छोटे पक्षी

पकड़ लाते हैं और उन्हें उनके ही सामने मारने का नाटक करते हैं तो ये

बनिया लोग उन जीव जंतुओं को खरीद लेते हैं और उनके बदले जो पैसे

देते हैं ये पैसे उनकी वास्तविक कीमत से भी ज्यादा होते हैं ताकि उन

जीव-जंतुओं का जीवन बच सके और वे मुक्त विचरण कर सकें। यदि