1. हिंदुत्व के प्रतीक - Page 171

156 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

राज्य के राजा या गवर्नर किसी व्यक्ति को उसके द्वारा किए गए अपराध के लिए फांसी की सजा दे देता है तो वे स्वयं एक साथ इकट्ठे हो जाते हैं और उस व्यक्ति को न्यायालय से खरीद लेते हैं, यदि वे उसे बेचने के इच्छुक हों, ताकि उसकी मृत्यु न हो। अनेक प्रकार के बीढ़ फकीर जब इन लोगों से भीख लेना चाहते हैं। तो वे बड़े-बड़े पत्थरों से अपने कंधों और पेट को जोर-जोर से पीटते हैं, मानों वे स्वयं को उनके सामने मार ही डालेंगे। इसे रोकने के लिए वे उन्हें बहुत ज्यादा भिक्षा दे देते हैं ताकि वे शांतिपूर्वक चले जाएं। अन्य अपने पास छुरी-चाकू रखते हैं, जिनसे वे ऊपरी बाहों और टांगों को घायल कर लेते हैं और इनको भी वे बहुत सारी भिक्षा दे देते हैं ताकि वे स्वयं को न मारें। अन्य उनके दरवाजे पर जाते हैं और अपने लिए चूहे तथा सर्पों को मारने की धमकी देते हैं। उन्हें भी वे बहुत सारा धन दे देते हैं ताकि वे ऐसा न करें। इसकी वजह से बीढ़ उनका सम्मान करते हैं। जब ये बनिया लोग सड़क पर चींटियों के झुंड को देखते हैं, तो वे पीछे हट जाते हैं और उन्हें बिना कुचले हुए दूसरे रास्ते से निकल जाते हैं और अपने घरों में वे दिन के प्रकाश में ही भोजन करते हैं। वे न तो रात में और न दिन में दिया जलाते हैं, क्योंकि छोटे-छोटे कीट-पतंगे उसी लपटों से जल जाते हैं जब रात में प्रकाश की बहुत आवश्यकता होती है तो उनके पास वार्निश किए गए कागज या कपड़े की लालटेन होती है, ताकि कोई भी जीवधारी उसमें प्रवेश न कर सके और उसकी लपटों से न मर सकें और यदि इन लोगों के जुएं पड़ जाती हैं तो वे उन्हेंं मारते नहीं हैं। लेकिन जब से उन्हें अत्यधिक कष्ट देती हैं तो वे उन मूर्तिपूजकों को बुलाते है जो उन्हीं से साथ रहते हैं, जिन्हें वे पवित्र व्यक्ति मानते हैं और जो साधुओं के सदृश होते हैं, कड़ी तपस्या करके जीवन बिताते है और देवताओं की भक्ति करते हैं। बनिए लोग इन्हें अपने घरों में रखते हैं, और ये जितनी भी जुएं पकड़ते हैं, उन्हें अपने सिरों पर रख लेते हैं और मांस खिलाकर उनकी वृद्धि करते हैं तथा ऐसा करके वे कहते हैं वे अपने कष्ट की बहुत बड़ी सेवा करते हैं। इस प्रकार वे कभी हत्या न करने के अपने नियम का कठोरता से पालन करते हैं। दूसरी ओर वे बढ़े सूदखोर होते हैं, माप तौल, सिक्के और दूसरी चीजों में परले सिरे की बेईमानी करते हैं तथा बड़े झूठे होते हैं। वे मूर्तिपूजक लोग सांबले, लंबे, नाजुक और सुंदर होते हैं। सुंदर वस्त्र पहनते है तथा बहुत ही सात्विक भोजन करते हैं वे अपने खाने में दूध,