158 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हमेशा सांता मरिया के लिए पूछते हैं, जैसे कि उनको इसके बारे में समझ और जानकारी हो, और वे हमारे गिरजाघरों का हमारी तरह सही सम्मान करते हैं, और कहते है। कि हमारे और उनके बीच कोई खास अंतर नहीं। ये मरने वाली वस्तु को नहीं खाते और ये किसी की हत्या नहीं करते हैं। नहाने को ये बहुत बड़ा आयोजन मानते हैं तथा कहते हैं कि इससे उनको मोक्ष मिलता है।’’
‘‘कालीकट राज्य की बात करते हुए बारबोसा कहता हैः
कालीकट राज्य में ही एक अन्य जाति के लोग भी हैं, जिन्हें ब्राह्मण कहा जाता है, जिनमें से कुछ पुरोहित वर्ग के हैं (जैसे कि हम लोगों में पादरी होते हैं) जिनके बारे में मैं पहले ही कह चुका हूं। ये सभी एक ही भाषा बोलते हैं। ब्राह्मण के बेटे के अलावा कोई दूसरा ब्राह्मण नहीं बन सकता। जब ये सात वर्ष का होता है तो वह किसी खास जंगली जानवर, जो जंगली गधे के समान होता है, की बिना कमाई गई खाल की दो अंगुली मोटी पट्टी कंधे पर धारण करता है और अगले सात वर्षों तक, जब तक वे इस पट्टी को पहने रहते हैं, पान नहीं खाते हैं। जब वह चौदह वर्ष का हो जाता है, तब ये उसे ब्राह्मण बनाते हैं और उसका वह चमड़े का पट्टा वापस ले लेते हैं तथा उसे एक धागे की तीन लडि़यों वाला सूत्र पहनाते हैं, जिसे वह सारी उम्र पहने रहता है और जो उसके ब्राह्मण होने का प्रतीक होता है। ऐसा वे बड़े समारोहों का आयोजन करके करते हैं, जैसा कि हम यहां किसी पादरी के मामले में करते हैं जब वह पहली बार गिरजाघर में पूजा में भाग लेता है। उसके बाद ब्राह्मण पान खा सकता है, लेकिन मांस या मछली नहीं खा सकता। उनका भारतीयों के बीच अधिक सम्मान होता है और जैसा कि मैं पहले ही कह चुका हूं, वे कुछ भी करें, उन्हें मृत्यु-दंड नहीं दिया जा सकता। उनके मुखिया ही उन्हें छोटा-मोटा दंड देते हैं। वे हमारी तरह एक बार शादी करते हैं और उनमें केवल सबसे बड़ बेटा ही शादी करता है। उसे सम्पत्ति के अखंड स्वामी के रूप में माना जाता है। दूसरे भाई जीवन भर अविवाहित रहते हैं। ये ब्राह्मण अपनी पत्नियों को सुरक्षित रखते हैं और उनका अत्यंत सम्मान करते हैं ताकि कोई दूसरा व्यक्ति उनके साथ सो न सके। यदि उनमें से कोई मर जाती है, जो वे पुनः शादी नहीं करते। लेकिन यदि कोई महिला अपने पति के साथ प्रपंच करती है तो उसे जहर देकर मार दिया जाता है, जो भाई कुंवारे रहते हैं वे नायर महिलाओं