160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
लड़की वयस्क हो गई है तो वह अपने रिस्तेदारों तथा मित्रों को अपनी पुत्री का सम्मान करने के लिए तैयार करती है। इसके बाद वह किसी
खास रिश्तेदार या खास मित्र को अपनी पुत्री से विवाह करने के लिए कहती है। इसके लिए वह व्यक्ति स्वेच्छा से वायदा करता है और तब वह एक आभूषण बनवाता है, जो आधी अशरफी का बना होता है और जो आकार में पट्टी की तरह लंबा होता है इसके बाद मां एक निर्धारित दिन को अपनी सजी-धजी पुत्री के साथ उपस्थित होती है जो बहुमूल्य आभूषण पहने होती है। बड़े आनंदपूर्वक नाच-गाना होता है और लोगों की बहुत भीड़ जमा होती है। उसके बाद सगे-संबंधी या मित्र उस आभूषण को लेकर आते हैं और कुछ खास क्रियाकलाप करके उस आभूषण को उस लड़की के गले में पहना देते हैं। वह इसे जीवन भर एक प्रतीक के रूप में पहने रहती है और उसके बाद वह जिसके साथ भी रहना चाहती है, रह सकती है। वह व्यक्ति उसके पास बिना सोये ही चला जाता है, क्योंकि वह उसका सगा-संबंधी होता है। यदि वह उसका रिश्तेदार नहीं है तो वह उसके साथ सो सकता है, लेकिन वह उसके साथ सोने के लिए बाध्य नहीं होता। उसके बाद मां अपनी पुत्री के लिए नवयुवकों की तलाश करती है_ वह नायर होना चाहिए जो उसकी पुत्री के साथ संभोग कर सके। वे किसी महिला का कोमार्य भंग करना घिनौना काम समझते हैं और जब कोई व्यक्ति एकबार उसके साथ सो लेता है, वह दूसरे लोगों के साथ सहवास करने के योग्य हो जाती है। इसके बाद मां नायरों के बीच अन्य युवा नायरों की खोज करती है, जो उसकी पुत्री को रख सके, और उसकी अपनी रखैल बना सके, ताकि तीन या चार नायर उसे रखने और उसके साथ सोने के लिए तैयार हों तथा प्रत्येक उसे प्रातः दिन के लिए निर्धारित धन-राशि दे। उसके जितने अधिक प्रेमी होते हैं, उसका उतना ही अधिक सम्मान होता है। उनमें से प्रत्येक उसके साथ दिन के दोपहर से लेकर अगले दिन की दोपहर तक समय गुजारता है और इस प्रकार वे बिना किसी अंशाति के या आपस में झगड़ा किए हुए समय बिताते हैं। यदि उनमें से कोई भी उसे छोड़ना चाहता है, तो वह उसे छोड़ देता है, और दूसरी के साथ चला जाता है। ठीक इसी तरह यदि वह किसी व्यक्ति से दुखी या परेशान हो जाती है, तो वह उसे जाने के लिए कह देती है, और वह चला जाता है या उसके साथ अच्छे संबंध बना लेता है। यदि उनके कोई बच्चे होते हैं जो वे मां के पास रहते हैं, जो उन्हें पालती है