1. हिंदुत्व के प्रतीक - Page 176

हिंदुत्व के प्रतीक

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क्योंकि वे उन्हें किसी व्यक्ति विशेष का बच्चा नहीं मानती, भले ही उसमें और उस व्यक्ति में समानता हो, वह व्यक्ति उन बच्चों को अपने बच्चे नहीं मानता है_ और न ही उन्हें अपनी संपत्ति का उत्तराधिकारी क्योंकि, जैसा कि मैं पहले ही कह चुका हूं, उनके उत्तराधिकारी उनके भांजे होते हैं।, जो उनकी बहनों के बेटे होते हैं। यदि कोई इस नियम के बारे में गहराई से सोचेगा तो वह पाएगा कि इसे किसी सामान्य व्यक्ति की सोच की तुलना में बड़ी गहराई से सोचा-विचारा गया था, क्योंकि लोग कहते हैं कि राजाओं ने इसकी इसीलिए व्यवस्था की थी ताकि बच्चों को पालने जैसे भार और मेहनत के कारण नायरों को उनकी सेवा से अलग न रहना पड़ें।’’

‘‘मलाबार राज्य के लोगों की एक और भी जाति है जिसे वे बियाबार, भारतीय व्यापारी, देश के मूल निवासी कहते हैं। वे हर प्रकार के माल का व्यापार करते हैं और वह व्यापार समुद्री बंदरगाहों तथा देश के अंदर, दोनों जगहों पर कहते हैं जहां कहीं उनका व्यापार अत्यधिक लाभदायक हो। वे नायरों तथा किसानों से साबुन, काली मिर्च तथा अदरक इकट्ठा कर लेते हैं और समय पूर्व ही नई फसलों को सूती कपड़ों तथा अन्य वस्तुओंµजिन्हें वे समुद्री बंदरगाहों पर रखते हैं, µ के बदले खरीद लेते हैं। उसके बाद वे उन्हें बेचते हैं और इस प्रकार अत्यधिक पैसा कमाते हैं। उनके विशेषाधिकार इस प्रकार के हैं कि जिस देश में भी वे रहते हैं, उस देश का राजा कानूनी प्रक्रिया द्वारा उन्हें फांसी नहीं दे सकता।’’

‘‘इस देश में एक और जाति है, जिसे कुईऐवम कहते हैं। वे नायरों से भिन्न नहीं हैं। फिर भी उस गलती के कारण जो उन्होंने की है, वे हमेशा ही अलग रहते हैं। उनका कार्य मूर्तियों और राजाओं के लिए मिट्टी के बर्तन और उनकी छतों के लिए इंर्टें तैयार करना होता है। इनकी छत खपरैल की जगह ईंटों की बनी होती हैं_ जैसा कि मैं पहले ही कहा चुका हूं दूसरे घर छप्पर के बने होते हैं। इनकी अपनी अलग ढंग की मूर्ति-पूजा होती है तथा इनकी अलग प्रकार की मूर्तियां होती हैं’’।

‘‘एक दूसरे मेनाटोज नाम की मूर्ति-पूजक जाति है, जिसका व्यवसाय राजाओं, ब्राह्मणों तथा नायरों के कपड़े धोना है। यही इनकी जीविका का साधन है और वे कोई अन्य व्यवसाय नहीं कर सकते हैं।’’

‘‘इन जातियों से नीची एक अन्य जाति और भी है, जिसे केलेटिस कहा