1. हिंदुत्व का दर्शन - Page 19

4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

काली बिल्ली को खोज रहा है, जो वहां है ही नहीं।’ इसकी प्रतिक्रियास्वरूप दार्शनिक ने अध्यात्मवादी पर आरोप लगाया कि वह ‘एक ऐसे अंधे व्यक्ति की तरह है, जो अंधेरे कमरे में एक काली बिल्ली को खोज रहा है, जब कि बिल्ली का वहां कोई अस्तित्व है ही नहीं, और भी वह उसे पा लेने की घोषणा करता है।’ शायद ‘धर्म का दर्शन’ शीर्षक ही गलत है, जिसके कारण उसकी सही व्याख्या करने में भ्रम पैदा होता है। प्रोफेसर प्रिंगले-पेटीसन ख्1, ने धर्म के दर्शन का अर्थ समझाते हुए जो अपना बुद्धिमत्तापूर्ण मत व्यक्त किया है, वह मुझे उसके निश्चित विषय के बहुत करीब लगता है। प्रोफेसर प्रिंगले के अनुसारः

‘‘सामान्यतः हम जिसे धर्म का दर्शन कहते हैं, उसके संदर्भ में कुछ

शब्द उपयोगी हो सकते हैं। बहुत पहले दार्शनिक प्लेटों (अफलातून) ने

दर्शनशास्त्र को किसी विषय पर विहंगम दृष्टि डालना कहा था। इसे हम

दूसरे शब्दों में इस प्रकार भी कह सकते हैं कि दर्शन संसार के सभी प्रमुख

रूपों के संदर्भ में समग्र और संपूर्ण विश्व का अंश मात्र होते हुए इन मुख्य

लक्षणों को उनके परस्पर संबंधों के अर्थ में समझने का एक प्रयास है।

केवल इसी तरह हम संसार की प्रक्रिया, आधार और इसके स्वरूप के बारे

में अपने अंतिम निष्कर्षों तक पहुंचने तथा समझने की क्षमता प्राप्त कर सकते

हैं और किन्हीं विशेष कारणों के महत्व का सही अंदाजा लगा सकते हैं।

तदनुसार, किसी भी विशेष अनुभव को, धर्म के दर्शन को, कला के दर्शन

और विधि के दर्शन को, व्यक्ति जिन मनुष्यों तथा संसार के मघ्य निवास

करता है, उसके प्रति अपने दृष्टिकोण, अनुभव के विश्लेषण तथा व्याख्या के

अर्थ में ही लेना चाहिए और जब कुछ घटनाएं, जिन पर हम अपना ध्यान

केंद्रित करते हैं, इतनी सार्वभौमिक और उल्लेखनीय होती हैं कि वे धर्म के

इतिहास से मनुष्य के धार्मिक अनुभव के दर्शन से भी प्रकट हों, तब ऐसी

सभी घटनाएं हमारे दार्शनिक निष्कर्षों पर निर्णायक प्रभाव डाले बिना नहीं रह

सकतीं। वस्तुतः अनेक लेखकों द्वारा इस विषय पर व्यक्त किए गए विचार

मात्र सामान्य विचार हैं।

जिन तत्वों के साथ धर्म के दर्शन का संबंध है, उनकी संपूर्ति इस विषय

के अत्यंत बोधगम्य अर्थ में धर्म के इतिहास से होती है। जैसा कि प्रसिद्ध

विद्वान टीले ने कहा है, ‘सभ्य तथा असभ्य संसार के सभी मृत और सजीव

  1. दि फिलासफी ऑफ रिलीजन, आक्सफोर्ड, पृष्ठ 1-2