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हिंदुत्व का दर्शन

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आधुनिक समय में मलाचि नाम के धर्मोंपदेशक ने किसी मूर्तिपूजक स्त्री को

‘विलक्षण देवता की पुत्री, कहा है। निस्संदेह यह सभी संबोधान उस भाषा

का एक भाग है, जो इजराइल के पड़ोसी लोग अपने लिए प्रयोग करते थे।

सीरिया और पेलेस्टिनियन देशों में प्रत्येक जाति अथवा अनेक छोटी जातियों

का एक जमघट भी अपने-आपकों स्वतंत्र जाति के रूप में मानता है, और

अपनी मूल उत्पत्ति का संबंध उस प्रथम पितामह (देवता) के साथ जोड़ता

है। ग्रीक देश के लोगों की तरह उनके लिए भी यह पितामह अथवा वंश

का उत्पत्तिदाता वंश का देवता ही होता है। बहुत से नवीनतम अन्वेषकों के

अनुमान से ईसाई धर्म की पुस्तक के पहले खंड में प्रांतों की पुरानी वंशावली

में अनेक देवताओं के नाम पाए जाते हैं। यह बात इस विचार के अनुरूप ही

है। उदाहरण के तौर पर, एडोमाईट लोगों के उत्पत्तिदाता एडम की हिब्र लोगों

ने जेकब के भाई ईशु के साथ पहचान बताई है, परंतु मूर्तिपूजकों के लिए

वह देवता था। यह बात ‘ओबेडेडम’ लोगों से स्पष्ट होती है, जो ‘एडम के

उपासक’ हैं। फोयनिशियन और बेबिलयन वंशों के वर्तमान वंशों की उत्पत्ति

तब हुई, जब प्राचीन धर्म और प्रत्येक देवता को किसी जाति विशेष के साथ

संबंधित होने की बात लोग भूल गए थे अथवा यह बात महत्वहीन बन गई

थी परंतु सर्वसाधारण रूप में यह धारणा आज भी प्रचलित है कि मनुष्य

देवताओं की संतान है। फिलो बेबलिस वंश के लोगों के विश्व-निर्माण के

फोयनिशियन सिद्धांत में यही धारणा कुछ अस्पष्ट रूप से व्यक्त की गई

है। इसका कारण लेखक का संकेच था। इस सिद्धांत के अनुसार, देवता दैवी

पुरुष होते हैं, जो अपनी जाति के लिए महान उद्धारक का कार्य करते हैं।

उसी प्रकार से बेरोसस लोगों की चाल्डियन पौराणिक कथा में यह धारणा

कि मनुष्य भी देवों के रक्त संबंध के ही होते हैं, बहुत ही अपरिपक्व रूप

से व्यक्त की गई है। यह कथा बहुत प्राचीन समय की नहीं है। इसमें यह

कहा गया है कि पशु-पक्षी तथा मनुष्य, सभी को उस मिट्टी से बनाया गया,

जिसमें किसी सिर कटे देवता का रक्त मिलाया गया था। ख्1, ’’

मनुष्य और देवताओं के इस खून के रिश्ते की कल्पना का एक महत्वपूर्ण परिणाम हुआ। प्राचीन संसार के लिए देवता भी मानव ही था और इसलिए वह परिपूर्ण सद्गुण तथा उत्तमता के योग्य नहीं था। देवताओं का स्वभाव भी मनुष्यों से मिलता-जुलता था, इसलिए मनुष्यों में जो भावनाएं, बीमारी तथा दुर्गुण पाए जाते हैं, वे उनमें भी होते थे। प्राचीन संसार के देवताओं की मनुष्यों के समान वासनाएं तथा आवश्यकताएं

  1. दि रिलीजन ऑफ सैमाइट्स