1. हिंदुत्व का दर्शन - Page 55

40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उल्लेख करूंगा, जिनका संबंध दीक्षा, गायत्री तथा दैनिक हवन से है।

पहले दीक्षा-संस्कार को देखते हैं। किसी व्यक्ति का पवित्र धागे से अभिषेक (जनेऊ पहनना) कर दीक्षा-संस्कार सम्पन्न किया जाता है। इस अभिषेक-संस्कार के मनु के कुछ महत्वपूर्ण नियम हैंµ

2.36. जन्म के बाद ब्राह्मण पिता को आठवें वर्ष में, क्षत्रिय पिता को ग्यारहवें

वर्ष में, और वैश्य पिता को बारहवें वर्ष में अपने पुत्र को उसके वर्ग-प्रतीक

का अभिषेक करना चाहिए।

2.37. ब्राह्मण अपने बालक के ज्ञान-वर्धन के लिए पांचवे वर्ष में क्षत्रिय

अपने बालक का पराक्रम बढ़ाने के लिए छठे वर्ष में और वैश्य अपने बालक

के धन-धान्य की समृद्धि के लिए आठवें वर्ष में उपनयन संस्कार कराए।

2.38. ब्राह्मण को सोलह वर्ष, क्षत्रिय की बाईस और वैश्य की चौबीस वर्ष

की अवस्था होने से पहले गायत्री मंत्र द्वारा उपनयन कराना चाहिए।

2.39. इसके बाद, इन तीनों वर्णों के सभी युवक, जिनका उचित समय पर

अभिषेक न हुआ हो, जाति से बहिष्कृत बन जाते हैं, उनका गायत्री से पतन

होता है और गुणवान लोग उनकी निंदा करते हैं और वे ब्रात्य कहलाते हैं।

2.147. मनुष्य को विचार करना चाहिए कि उसके माता-पिता ने अपनी

परस्पर संतुष्टि के लिए उसे जो जन्म दिया है और जो वह अपनी मां के

गर्भ से प्राप्त करता है, वह केवल मानव-जन्म है।

2.148. परंतु संपूर्ण वेदों का ज्ञानी आचार्य जिस बालक को विधिपूर्वक उसकी दैवी

माता सावित्री से उत्पन्न करता है वह बालक सत्य, अजर और अमर है।

2.169. पहला जन्म नैसर्गिक माता से, दूसरा जन्म अपनी परिधि के बंधन से

और तीसरा जन्म यज्ञ-संस्कारों के उचित पालन से होता है। वेदों के अनुसार,

जिसे सामान्य रूप से द्विज कहा गया है, उनके ऐसे जन्म होते हैं।

2.170. इनमें से उसका दैवी जन्म वह है जो परिधि के बंधन से तथा यज्ञ

के धागे (जनेऊ) से होता है और इस जन्म में उसकी माता गायत्री होती है

और पिता आचार्य होता है।

अब हम गायत्री को देखते हैं। वह एक मंत्र अथवा एक विशेष आध्यात्मिक शक्ति की प्रार्थना है। मनु ने इसका इस प्रकार स्पष्टीकरण किया है।

2.76. ब्रह्मा ने एक पटक आदि तीनों वेदों से, ‘अ’ ‘उ’ तथा ‘म’ यह तीन

अक्षर पिरोकर निकाले, जिनके मिश्रण से तीन अर्थ एक ही पद्यांश के तीन गूढ़

शब्द भूः, भुवः, स्वः बन गए, जिसका अर्थ है, पृथ्वी, आकाश, स्वर्ग।