42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सोलहवें भाग के बराबर नहीं है।
अब दैनिक यज्ञ-संस्कार देखें।
3.69. अनजाने में किए गए अपराधों का प्रायश्चित करने के लिए विद्वान
ऋषियों ने प्रतिदिन घर में करने के लिए पांच महायज्ञ बताए हैं।
3.70. धर्म-शास्त्रों का अध्ययन और अध्यापन वेदों के अनुसार यज्ञ हैं अन्न
और जल अर्पण करना पितृ यज्ञ है। अग्नि को आहुति देना देवों के लिए
यज्ञ है। सजीव प्राणी यज्ञ को चावल अथवा अन्य भोजन देना भूत यज्ञ है
और अतिथि का आदर-सत्कार करना यज्ञ है।
3.71. इन पंचमहायज्ञों को यथाशक्ति नहीं छोड़ने बाबा ग्रहस्थाश्रम में रहता
हुआ भी द्विज पंचसूना (पांच पापों) के दोष से निष्कलंक रहता है।
अब हम आश्रम-प्रथा को देखें। आश्रम-सिद्धांत हिंदुत्व की एक खास विशेषता है। दूसरे किसी भी अन्य धर्म की शिक्षाओं में इस सिद्धांत ने कोई स्थान पाया हो, ऐसा प्रतीत नहीं होता। आश्रम-सिद्धांत के अनुसार, जीवन को चार अवस्थाओं में विभाजित किया गया है। ये चार अवस्थाएं हैं-ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। ब्रह्मचर्य अवस्था में मनुष्य अविवाहित होता है और अपना सब समय शिक्षा तथा अध्ययन में व्यतीत करता है। इस अवस्था के समाप्त होने के बाद वह गृहस्थ में प्रवेश करता है अर्थात् वह विवाह करता है, परिवार का पालन-पोषण करता है और भौतिक सुखों की ओर ध्यान देता है। उसके बाद वह तीसरी अवस्था में प्रवेश करता है और वानप्रस्थ कहलाता है। वानप्रस्थी के रूप में वह जंगल में जाकर साधु के रूप में जीवन व्यतीत करता है। परंतु वह अपने परिवार से संबंध विच्छेद नहीं करता अथवा संपत्ति से अपना अधिकार भी नहीं त्यागता। उसके बाद चौथी और अंतिम अवस्था आती है। वह है संन्यास की अवस्था, जिसका मतलब है ईश्वर की खोज में संसार का संपूर्ण त्याग करना। ब्रह्मचारी और गृहस्थ अवस्थाएं एक प्रकार से स्वाभाविक अवस्थाएं हैं। अंतिम दो अवस्थाओं के बारे में केवल सिफारिश की जाती है। उसके बारे में कोई बंधन नहीं है। इस संबंध में मनु ने जो-कुछ कहा है, वह निम्न प्रकार हैः
6.1. द्विज व्यक्ति, जो नियमानुसार गृहस्थ का जीवन व्यतीत कर चुका है,
दृढ़ संकल्प करते हुए तथा अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण करते हुए जंगल में
जाकर (नीचे दिए गए नियमों का पालन करते हुए), रह सकता है।
6.2. जब एक गृहस्थी देखे कि उसकी त्वचा झुर्रियों से भरने लगी है। उसके
बाल सफेद होने लग जाएं और वह अपनु पुत्रों के पुत्र देख ले, तब उसे
जंगल में जाकर रहना चाहिए।