44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
धार्मिक-विधि तथा संन्यास का महत्व तथा अर्थ स्पष्ट करने के लिए मैं मनु को ही यहां उद्धत करना चाहूंगा। मनु के निम्नलिखित श्लोकों पर हम विचार करेंः
2.26. द्विज-जन्में मनुष्य को वेदों द्वारा निर्देशित गर्भ-धारण समारोह तथा
धार्मिक संस्कार करने चाहिए, जिसके कारण उसका शरीर इस जन्म में तथा
मृत्य के बाद पवित्र बन जाता है और पाप से मुक्त हो जाता है।
2.28. वेदों के अध्ययन से, प्रतिज्ञाओं से आहुति चढ़ाकर पवित्र पाठों के
उच्चारण से, तीनों वेदों के उपार्जन से, देव-ऋषि तथा पितरों को तर्पण देकर,
पुत्रों को जन्म देकर, महान यज्ञ करके तथा धार्मिक संस्कारों द्वारा इस मानव
शरीर को ब्रह्म प्राप्ति के योग्य बनाया जाता है।
यह संस्कारों का ध्येय तथा उद्देश्य है। मनु ने संन्यास का भी ध्येय तथा उद्देश्य स्पष्ट किया हैः
6.81. इस प्रकार से, धीरे-धीरे जो सभी संबंधों का त्याग करता है तथा सभी
द्वन्द्वों से मुक्त होता है, वही केवल ब्रह्म में लीन होता है।
6.85. एक द्विज-जन्मा व्यक्ति, जो लगातार उपरोक्त कर्तव्यों का पालन करते
हुए संन्यास लेता है, वह इस धरती पर सभी पापों से मुक्त हो जाता है और
श्रेष्ठ ब्रह्म पद को प्राप्त होता है।
इन श्लोकों से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि स्वयं मनु के अनुसार धार्मिक संस्कारों का उद्देश्य शरीर पवित्र बनाना, तथा पाप से इस जीवन में तथा उसके बाद के जीवन में मुक्ति पाना, और अपने-आपको ईश्वर के साथ मिलन के योग्य बनाना है। मनु के अनुसार, संन्यास का उद्देश्य है ईश्वर तक पहुंचना और उसमें विलीन हो जाना है और फिर भी मनु कहता है कि धार्मिक विधि तथा संन्यास केवल उच्च वर्गों का ही अधिकार है। वह शूद्रों के लिए उन्मुक्त नहीं। क्या? शूद्र के लिए अपना शरीर पवित्र बनाना तथा अपनी आत्मा को शुद्ध बनाना आवश्यक नहीं है? क्या शूद्र ईश्वर तक पहुंचने की अभिलाषा नहीं रख सकता? कदाचित मनु ने इसका उत्तर ‘हां’ में दिया होगा। तब उसने ऐसे नियम क्यों बनाए? इसका उत्तर यह है कि मनु सामाजिक असमानता में कट्टर विश्वास रखता था और वह धार्मिक समानता को स्वीकार करने के खतरे को जानता था। यदि मैं ईश्वर के सामने समान हूं तब इस धरती पर समान क्यों नहीं बन सकता? मनु शायद इस प्रश्न से भयभीत था। इसकी स्वीकृति देने और सामाजिक असमानता को समाप्त करने के लिए धार्मिक समानता की अनुमति देने के बजाय उसने धार्मिक समानता को नकारना ही अधिक पसंद किया।