46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है, वह व्यक्ति जो मगध नाम के देश का निवासी हो। ‘वैदेहिक’ के संबंध में पाणिनि कहते हैं, इसका मतलब है वह व्यक्ति को ‘विदेह’ नाम के देश का निवासी हो। दोनों मेंं कितना विरोधाभास है। पाणिनि ईसा से 300 वर्ष पहले हुआ। मनु ईसा के 200 वर्ष पश्चात् हुआ। तब लोगों पर पाणिनी के समय में कोई कलंक नहीं लगा था। वे लोग मनु के हाथों कलंकित हो गए। इसका उत्तर यही है कि मनु उन लोगों को अधःपतित करने पर तुलना हुआ थ। मनु लोगों को जान-बूझकर बदनाम करने पर क्यों तुला हुआ था? यह ऐसा कार्य है, जिसकी खोज-बीन ख्1, अभी की जानी है। परंतु इस बीच हमारे सामने एक ऐसा विलक्षण विरोधाभास आता है कि जब धर्म मनुष्य-मात्र को ऊंचा उठाने में और उन्नत करने में लगा हुआ था, हिंदु धर्म उन्हें अधःपतित और अप्रतिष्ठित करने में व्यस्त था।
हिंदुत्व में हीनता की भावना किस प्रकार व्याप्त है, उसे एक अन्य उदाहरण देते हुए मैं हिंदु बालकों के नामकरण के नियमों के द्वारा स्पष्ट करूंगा।
हिंदुओं के नाम चार प्रकार के होते हैं इसका संबंध या तो-
(1) पारिवारिक देवता के साथ होता है,
(2) जिस माह में बच्चा जन्म लेता, उसके साथ,
(3) जिन ग्रह-नक्षत्रों में बच्चा जन्म लेता है उसके साथ, अथवा,
(4) पूर्ण रूप से प्रासंगिक अर्थात् व्यवसाय के साथ होता है।
मनु के अनुसार, हिंदु का प्रासंगिक नाम दो भागों का होना चाहिए और मनु यह भी निर्देश देता है कि पहला भाग तथा दूसरा भाग किन बातों को दर्शाए। ब्राह्मण के नाम का दूसरा भाग ऐसा शब्द हो जो आनंद व्यक्त करे, क्षत्रिय का ऐसा हो जो रक्षा व्यक्त करे, वैश्य के लिए ऐसा शब्द हो जो संपन्नता व्यक्त करे और शूद्र के लिए ऐसा शब्द हो जो सेवा व्यक्त करे। इसके अनुसार ब्राह्मणों के लिए शर्मा (प्रसन्नता) अथवा देव (ईश्वर), क्षत्रिय के लिए राजा (अधिकार) अथवा वर्मा (शस्त्र), वैश्यों के लिए गुप्ता (दान) अथवा दत्ता (दानकर्ता) और शूद्रों के लिए दास (सेवा)। ये शब्द नामों का दूसरा भाग बने हैं। नाम के पहले भाग के संबंध में मनु कहता है किस ब्राह्मण के लिए वह शुभ-सूचक हो और वैश्य के लिए संपत्ति का सूचक हो। परंतु शूद्र के लिए मनु कहता है कि उसके नाम का पहला भाग कोई ऐसा शब्द होना चाहिए, जो घृणा योग्य हो। जो लोग ऐसा दर्शन अविश्वसनीय मानते हैं, वे शायद इन बातों के वास्तविक संदर्भ जानना चाहेंगे। मैं मनुस्मृति से निम्नलिखित कुछ
- देखिए मेरा निबंध, ‘मनु ऑन कास्ट-ए पजल’। (यह लेख प्राप्त हुए पत्रों में नहीं मिला है)।