1. हिंदुत्व का दर्शन - Page 64

हिंदुत्व का दर्शन

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10.121. अगर कोई शूद्र ब्राह्मण की सेवा करते हुए अपना पालन-पोषण

नहीं कर सकता, तब वह क्षत्रिय की सेवा कर सकता है अथवा किसी धनी

वैश्य की भी सेवा करके अपना पालन-पोषण कर सकता है।

10.122. परंतु शूद्र को ब्राह्मण की सेवा करनी चाहिए........।

मनु ने शूद्रों के लिए कोई आदर्श बनाने की बात को ही नहीं छोड़ दिया, वह एक कदम और आगे बढ़ता है और कहता है कि उसके लिए नियत किए गए कार्य से वह भाग नहीं सकता और न ही उसे टाल सकता है क्योंकि मनु ने राजा के लिए जो कर्तव्य निश्चित किए हैं, उनमें से एक कार्य यह है कि राजा यह देखे कि शूदों सहित सभी जाति के लोग अपने निश्चित कर्तव्यों का पालन करें।

8.4.10. राजा प्रत्येक वैश्य को उसका व्यवसाय करने की अथवा पैसा

उधार देने की अथवा खेती करने की अथवा पशु पालन की, और शूद्र जाति

के प्रत्येक मनुष्य को द्विज की सेवा करने की आज्ञा दे।

8.4.18. पूर्ण रूप से जाग्रत तथा सचेत होकर राजा आदेश दे कि वैश्य तथा

शूद्र अपने-अपने कर्तव्यों का पालन करें, क्योंकि जब ये लोग अपने कर्तव्यों

का पालन करना छोड़ देते हैं, तब सारा संसार भ्रम में पड़ जाता है।

कर्तव्य का पालन न करना अपराधा माना गया था, जिसके लिए कानून के अनुसार राजा दंड देता था।

8.335. यदि पिता, शिक्षक, मित्र, माता, पत्नी, पुत्र, घरेलू पुरोहित अपने-अपने

कर्तव्य का दृढ़ता व सच्चाई के साथ निष्पादन नहीं करते हैं तो इनमें से

किसी को भी राजा द्वारा बिना दंड के नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

8.336. जिस अपराध में साधाण व्यक्ति एक पण से दंडनीय है, उसी

अपराध के लिए राजा सहस्त्र पणा से दंडनीय है, ऐसा शास्त्र का निर्णय है।

उसे यह दंड राशि पुरोहित को या नदी को भेंट करनी चाहिए।

इन नियमों की आध्यात्मिक तथा आर्थिक, दो प्रकार की विशेषताएं हैं। आध्यात्मिक अर्थ से यह नियम गुलामी के दर्शने की रचना करते हैं। जिन लोगों को गुलामी के केवल बाह्य वैधानिक अर्थ की जानकारी है और इसके अंतर्निहित अर्थ का ज्ञान नहीं है, उन्हें संभवतः यह चीज स्पष्ट न हो। इसके आंतरिक अर्थ के अनुसार, प्लेटो ने जैसा परिभाषित किया है, गुलाम ऐसा व्यक्ति है जो दूसरों से उन उद्देश्यों को स्वीकार करता है, जो उसके आचरण को नियंत्रित करते हैं। इस अर्थ से एक गुलाम की अपनी कोई नियति नहीं है। वह केवल दूसरों की इच्छापूर्ति का एक साधन है। इस बात को समझने पर स्पष्ट हो जाता है कि शूद्र गुलाम है। नियमों के आर्थिक