हिंदुत्व का दर्शन
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लिया तब देवताओं के इस राजा के अदृश्य हो जाने के कारण स्वर्ग तथा पृथ्वी का संपूर्ण व्यवहार भ्रम में पड़ गया तब ऋषि और देवताओं ने नहुष से राजा बनने की प्रार्थना की। बहुत कहने के बाद उसने राजा बनना स्वीकार किया। इस पद पर पहुंचने से पहले तक उसने सदाचार का जीवन व्यतीत किया था लेकिन भोग-विलास और ऐश्वर्य की सभी वस्तुओं के बीच वह अपने संयम को नियंत्रण में नहीं रख सका। इस तरह वह रासलीला में खो गया। वहां तक कि इंद्र की पत्नी इंद्राणी को भी भोगने की उसकी इच्छा हुई। रानी ने देवताओं के गुरु अंगिरस बृहस्पति की शरण ली, जिसने उसे रक्षा का वचन दिया। इस पर राजा नहुष बहुत क्रोधित हुआ। देवताओं ने उसे बहुत समझाया, लेकिन नहुष बोला कि ‘व्यभिचारी इच्छाओं में वह स्वयं इंद्र से अधिक बुरा नहीं है। प्रख्यात ऋषि की पत्नी अहिल्या के साथ इंद्र ने उसके पति के जीते जी ही संभोग किया था। तब आप सभी ने उसे क्यों नहीं रोका?’
नहुष के ऐसा कहने पर देवता इंद्राणी को लाने के लिए चले गए। लेकिन बृहस्पति उसे देने के लिए तैयार नहीं था। तथापि उसके कहने पर इंद्राणी ने नहुष से कुछ देर के लिए समय की याचना करते हुए कहा कि पहले वह जानना चाहती है कि उसके पति का क्या हुआ?
उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली गई। बाद में इंद्र की ओर से देवता विष्णु के पास गए और विष्णु ने वचन दिया कि यदि इंद्र उसके लिए बलि दे, तब वह दोषमुक्त हो जाएगा तथा अपना प्रभुत्व प्राप्त करेगा। इस तरह नहुष का नाश हो जाएगा। इस आधार पर इंद्र ने बलि दी, जिसका परिणाम इस प्रकार बताया गया हैः ‘ब्राह्मण हत्या का पाप, वृक्ष, नदियां, पर्वत, पृथ्वी, स्त्रियां तथा अन्य तत्वों में विभाजित होने के कारण देवों के राजा वसव (इंद्र) की दोषों तथा पाप से मुक्ति हो गई और वह आत्मनुशासित बन गया।’ इसके कारण नहुष के श्रेष्ठत्व को धक्का पहुंचा। बताया जाता है कि उसने अपना प्रभुत्व पुनः प्राप्त कर लिया होगा क्योंकि, जैसा हमें बताया गया है, इंद्र फिर नष्ट हो गया था, तथा अदृश्य हो गया था। जब इंद्र अदृश्य हो गया, तब इंद्राणी अपने पति की खोज में निकली। बहुत कोशिशों के बाद उपश्रिता (रात्रि तथा निशाचरों की देवी) की सहायता से उसने एक बहुत छोटे रूप में, हिमालय से उत्तर में एक समुद्र में कमल के डंठल पर से उसे जीवित खोज निकाला। उसने उसे नहुष के दुष्ट इरादों के बारे में बताया और कहा कि वह अपनी शक्ति के बल पर उसे मुक्त कराए और अपना प्रभुत्व पुनः स्थापित करे। चूंकि नहुष के पास इंद्र से अधिक शक्ति थी, अतः उसने कोई कदम उठाने से पहले उसे एक उपाय बताया, जिसमें अपहरण करने वाले को उसके स्थान से हटाया जा सकता है। उसने अपनी पत्नी से कहा कि वह नहुष से कहे, ‘यदि वह ऐसी दिव्य पालकी पर सवार हो उसके पास आएगा जिसे ऋषि कंधा दिए हों, तो वह स्वयं को उसे समर्पित कर देगी’ इस प्रकार देवताओं की यह बात नहुष के पास पहुंची,