हिंदुत्व का दर्शन
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इस तरह उस दुष्ट मनुष्य का पतन हो गया।
इसके पश्चात् राजा निमी और ब्राह्मण के संघर्ष का संदर्भ है। विष्णु पुराण में यह कथा निम्न प्रकार से हैः
राजा निमी ने ब्राह्मण ऋषि वशिष्ठ से एक ऐसे यज्ञ का अधिष्ठाता बनने की प्रार्थना की, जो एक हजार वर्षों तक चले। उत्तर में वशिष्ठ ने कहा कि वे पांच सौ वर्षों के लिए इंद्र के साथ यज्ञ करने में पहले से ही व्यस्त हूं और उन्होंने अपनी असमर्थता व्यक्त की, लेकिन कहा कि इस अवधि के बीत जाने के बाद वे उसके पास लौट आएंगे। राजा ने कुछ नहीं कहा और वशिष्ठ वहां से चले गए। लेकिन वापस लौटने पर ऋषि ने देखा कि राजा ने गौतम ऋषि (जो कि ब्राह्मण ऋषि वशिष्ठ के ही बराबर तेजस्वी थे) और अन्य ऋषियों को उस यज्ञ के लिए नियुक्त किया। उपेक्षा से भरे इस व्यवहार से क्षुब्ध होकर उन्होंने राजा को, जो उस समय नींद मेंं था, शाप दिया कि उसका शरीर नष्ट हो जाएगा। इसकी प्रतिक्रिया में राजा ने भी वशिष्ठ को शाप दिया कि राजा के शाप ने भी अपना प्रभाव दिखलाया उसके बाद उसकी मृत्यु हो गई। बाद में वशिष्ठ ने दूसरा शारीरिक रूप धारण किया। इस शाप के परिणामस्वरूप वशिष्ठ का भी तब पुनर्जन्म हुआ, जब उर्वशी को देखकर ऋषियों के वीर्य की बूंदें गिरीं। निमी के शव का संलेपन किया गया। जिस यज्ञ को वशिष्ठ ने आरंभ किया था, उसके समापन पर देवगण ऋषि-मुनियों से विचार-विमर्श के बाद उसे पुनर्जीवित करना चाहते थे, लेकिन वशिष्ठ ने इंकार कर दिया, तब देवताओं ने उसकी इच्छा के अनुसार उसका अस्तित्व सभी जीवित प्राणियों की आंखों के अंदर सुरक्षित कर रख दिया। इसी तथ्य के परिणामस्वरूप वे (ऋनि-मुनि) आंखों को मूंदते-खोलते रहते हैं (निमिष का अर्थ है, ‘पलक झपकाना’)। मनु ने ब्राह्मणों और राजा सुमुख के बीच एक अन्य संघर्ष की चर्चा की है। लेकिन इस संघर्ष के विस्तृत विवरण नहीं मिलते।
ब्राह्मण और क्षत्रिय राजाओं के बीच जो संघर्ष हुए, उनके यह कुछ-एक उदाहरण हैं। इन उदाहरणों से हमें ऐसा हमें समझना चाहिए कि ब्राह्मण और क्षत्रियों के बीच दो वर्गों के रूप में संघर्ष नहीं हुए। इन दो वर्गों के बीच भी संघर्ष हुए, जो कि राजाओं के साथ हुए संघर्षों से निराले है। यह बात ऐतिहासिक मान्यता प्राप्त सामग्री से स्पष्ट होती है। इस संदर्भ में तीन घटनाओं का उल्लेख किया जा सकता है।
पहला संदर्भ दो व्यक्तियों, विश्वामित्र और वशिष्ठ के बीच है, जो क्रमशः क्षत्रिय और ब्राह्मण थे। उन दोनों के बीच विवाद का विषय यह था कि क्या कोई क्षत्रिय ब्राह्मणत्व का दावा कर सकता है?
रामायण में इस कथा का उल्लेख है, और निम्न प्रकार से हैः
उसी कहानी के आधार पर हमें पता चलता है कि पहले कुश नाम का एक राजा था, जिसके पिता का नाम प्रजापति था। कुश राजा का भी एक पुत्र था जिसका नाम