हिंदुत्व का दर्शन
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ब्राह्मणों और क्षत्रियों के बीच वर्ण-संघर्ष की दूसरी घटना क्षत्रियों द्वारा ब्राह्मणों की हत्या से संबंधित है। यह कहानी महाभारत के आदिपर्व में वर्णित है, जो इस तरह से हैः
कृतवीर्य नाम का एक राजा था, जिसकी दानशीलता के कारण वेदों के ज्ञाता राजा के पुरोहित भी थे और उसी कारण वे अपनी जीविका उपार्जन करते थे। उन्होंने इस बीच काफी अन्न और धन भी कमाया। जब राजा की मृत्यु हुई तब उसके वंशजों को धन की कमी हो गई और तब इसकी याचना के लिए वे भृगुओं के पास आए, क्योंकि वे उनकी संपत्ति के बारे में जानते थे। कुछ भृगु लोगों ने अपना धन जमीन के नीचे छिपाकर रखा था, जो कुछ ने इसे ब्राह्मणों को दान कर दिया, क्योंकि वे क्षत्रियों से डरते थे, जब कि कुछ लोगों ने उन्हें बिना कुछ दिए लौटा दिया। एक बार ऐसा भी हुआ कि एक क्षत्रिय को किसी भृगु के मकान की जमीन खोदते समय उसमें गड़ा धन मिल गया। तब सभी क्षत्रिय इकट्ठे हो गए और उन्होंने इस खजाने को देखा। इससे उन्हें गुस्सा आ गया। परिणामस्वरूप उन्होंने सभी भृगुओं की उनकी गर्भवती स्त्रियों सहित हत्या कर दी। बाद में उनकी विधवाएं हिमालय पर्वत की ओर पलायन कर गईं। उनमें से एक विधवा ने अपने अजन्मे बच्चे को अपनी जांघ में छिपा लिया। क्षत्रियों को जब किसी ब्राह्मणी से उसके जीवित रहने की खबर मिली, जब उन्होंने उसकी हत्या करनी चाही। लेकिन वह बच्चा अपनी मां की जांघ से बाहर निकला और उसने अपने हत्यारों को अंधा बना दिया। कुछ दिनों तक इसी प्रकार पहाड़ों में भटकते रहने के बाद उन्होंने उसी बच्चे की मां से उन्हें दृष्टि प्रदान करने की प्रार्थना की। परंतु उसने उन लोगों को उस चमत्कारिक बालक उर्व के पास भेजा, जिसमें संपूर्ण वेदों ने अपने छह उपायों के साथ प्रवेश किया था। उसी बालक ने अपने रिश्तेदारों की हत्या के बदले में उनकी दृष्टि छीन ली थी_ और वे जब उसकी शरण में गए तो उनके दृष्टि वापस मिल गई। तथापि उर्व ने भृगु लोगों की हत्या के बदले में सभी प्राणियों को नष्ट करने की साधना की और तपस्या करते-करते ऐसी स्थिति में पहुंच गया कि उसके कारण देवता-असुर, दोनों और मनुष्य भी घबरा गए। लेकिन उसके पूर्वज (पितृ) स्वयं प्रकट हुए और उसे इस कार्य से विमुख करने के उद्देश्य से कहा कि वे ‘क्षत्रियों से उनकी हत्या का बदला नहीं लेना चाहते हैं श्रद्धावान भृगु असुरक्षित होने के कारण हिंसक वृत्ति के क्षत्रियों की हत्याओं की क्षमा नहीं करना चाहते। जब हम वृद्धावस्था से दुखी हो जाएंगे तब हम स्वयं ही उनके द्वारा अपनी हत्या की कामना करेंगे। जिसने भृगु के घर जमीन में धन दबा दिया था, स्वर्ण-प्राप्ति की इच्छा रखने वाले हम लोगों को धन से क्या लेना-देना?’ उन्होंने यह उपाय इसलिए किया कि वे आत्महत्या के दोषी नहीं बनना चाहते