4. सुधारक और उनकी नियति - Page 100

सुधारक और उनकी नियति

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  1. और परम श्रेष्ठ लोहिक्क ब्राह्मण के निवास स्थान पर गए और अपने लिए नियत आसन पर बैठ गए। और लोहिक्क ब्राह्मण ने बुद्ध के नेतृत्व में उनके संघ को संतुष्ट किया, अपने ही हाथों से पुष्ट और नरम, दोनों ही प्रकार का स्वादिष्ट भोजन तब तक परोसा, जब तक कि उन्होंने और ग्रहण करने से इंकार नहीं कर दिया। और जब परम श्रेष्ठ भोजन कर चुके, तो उन्होंने अपना पात्र धोया और हस्त-प्रक्षालन किया। लोहिक्क ब्राह्मण ने नीचे आसन ग्रहण किया और उनके पार्श्व में बैठ गया। और उसके इस प्रकार आसीन हो जाने पर परम श्रेष्ठ ने उससे निम्नानुसार कहाः

‘लोहिक्क, जो कुछ कहते हैं, क्या वह सच है कि तुम्हारे दिमाग में निम्नलिखित कुत्सित विचार उत्पन्न हो गया है (और उन्होंने उपरोक्त कथनानुसार वह विचार प्रकट किया)।

‘ऐसा ही है, गौतम।’

  1. ‘अब तुम क्या सोचते हो, लोहिक्क? क्या तुम साल-वाटिका में सुस्थापित नहीं हो?’

‘हां, ऐसा है, गौतम।’

‘तब, लोहिक्क, मान लो, कोई इस प्रकार कहेः ‘साल-वाटिका’ में लोहिक्क ब्राह्मण का राज्य है, उसे अकेले ही साल-वाटिका के संपूर्ण राजस्व और उत्पाद का उपभोग करने दो, किसी और को कुछ न मिले। ऐसी बात कहने वाला व्यक्ति खतरनाक होगा या नहीं, क्योंकि वह उन लोगों को छेड़ रहा है, जो तुम्हारे अधीन जीवनयापन करते हैं?’

‘हां, गौतम, वह खतरनाक होगा।’

‘और भय उत्पन्न करने वाला क्या वह व्यक्ति उनकी भलाई के लिए सहानुभूति रखता होगा या नहीं?’

‘वह उनकी भलाई के बारे में नहीं सोचेगा, गौतम।’

‘और उनकी भलाई की बात न सोचते हुए क्या उसका हृदय उनके पे्रम की ओर उन्मुख होगा अथवा उनसे शत्रुता रखेगा?’

‘शत्रुता रखेगा, गौतम।’

‘किंतु यदि किसी का हृदय शत्रुता में निमग्न है, तो वह अविश्वसनीय सिद्धांत है, अथवा विश्वसनीय?’

‘वह अविश्वसनीय सिद्धांत है, गौतम।’

‘अब अगर, लोहिक्क, कोई मनुष्य अविश्वसनीय सिद्धांत का मानने वाला है, तो मैं घोषणा करता हूं कि उसकी नियति यह होगी कि दो भावी जन्मों में एक बार वह या तो पाप मोचन के लिए जन्म लेगा अथवा एक पशु के रूप में उसका पुनर्जन्म होगा।’

  1. ‘अब तुम क्या सोचते हो, लोहिक्क? क्या कौशल-नरेश प्रसेनजित के अधिकार