4. सुधारक और उनकी नियति - Page 101

86 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

में काशी और कौशल नहीं हैं?’

‘हां, है, गौतम।’

‘तो, मान लो, लोहिक्क, यदि कोई इस प्रकार कहेः

‘कौशल-नरेश प्रसेनजित के अधिकार में काशी और कौशल हैं, उसे काशी और कौशल के संपूर्ण राजस्व और उत्पाद का उपभोग करने दो, अन्य किसी को कुछ न मिले। ऐसी बात कहने वाला व्यक्ति खतरनाक होगा या नहीं, क्योंकि उसने कौशल-नरेशन प्रसेनजित के अधीन जीवनयापन करने वाले मनुष्यों को, तुम्हें और अन्य लोगों को छेड़ा है।’

‘हां, गौतम, वह खतरनाक होगा।’

‘और भय उत्पन्न करने वाला वह व्यक्ति उनकी भलाई के लिए सहानुभूति रखता होगा या नहीं?’

‘वह उनकी भलाई के बारे में नहीं सोचेगा, गौतम?’

‘और उनकी भलाई की बात न सोचते हुए क्या उसका हृदय उनके पे्रम की ओर उन्मुख होगा अथवा उनसे शत्रुता रखेगा?’

‘शत्रुता रखेगा, गौतम।’

‘किंतु यदि किसी का हृदय शत्रुता में निमग्न है, तो वह अविश्वसनीय सिद्धांत है अथवा विश्वसनीय?’

‘वह अविश्वसनीय सिद्धांत है, गौतम।’

‘अब अगर, लोहिक्क, कोई मनुष्य अविश्वसनीय सिद्धांत का मानने वाला है, तो मैं घोषणा करता हूं कि उसकी नियति यह होगी कि दो भावी जन्मों में एक बार वह या तो पाप मोचन के लिए जन्म लेगा अथवा एक पशु के रूप में उसका पुनर्जन्म होगा।

  1. और 14. ‘इसलिए, लोहिक्क, तुम स्वीकार करते हो कि वह जो यह कहता है कि साल-वाटिका पर तुम्हारा अधिकार है, इसलिए तुम्हें वहां के संपूर्ण राजस्व और उत्पाद का उपभोग करना चाहिए और अन्य किसी को कुछ नहीं देना चाहिए, और वह जो यह कहता है कि कौशल-नरेश प्रसेनजित का काशी और कौशल पर अधिकार है, इसलिए उन्हें स्वयं वहां के संपूर्ण राजस्व और उत्पाद का उपभोग करना चाहिए और अन्य किसी को कुछ नहीं देना चाहिए, वह तुम्हारे अधीनस्थ रहने वालों के लिए भय उत्पन्न करेगा अथवा नरेश प्रसेनजित के अधीन रहने वाले तुम्हारे और अन्य लोगों के लिए भय उत्पन्न करेगा, और जो इस प्रकार दूसरों के लिए भय उत्पन्न करते हैं, उनमें उनके प्रति सहानुभूति का अभाव होता है। और जिस मनुष्य के प्रति सहानुभूति का अभाव है, उसका हृदय शत्रुता में निमग्न हो जाता है, और अपने हृदय को शत्रुता में निमग्न कर लेना अविश्वसनीय सिद्धांत है।