94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पर प्रतिहार, धार पर परमार, बुंदेलखंड पर चंदेल, अन्हिलवाड़ पर चावड़ा और चेदि पर कलचुरि शासन करते थे। इन सभी राज्यों के शासक राजपूत थे और राजपूत कुछ कारणों से, जो रहस्यपूर्ण हैं और जिनकी मैं बाद में चर्चा करूंगा, ब्राह्मणवादी धर्म के सबसे कट्टर समर्थक हो गए थे।
इन आक्रमणों के समय बंगाल दो राज्यों, पूर्वी तथा पश्चिम में, विभक्त हो गया था। पश्चिम बंगाल पर पाल वंश के राजाओं का शासन था और पूर्वी बंगाल पर सेन वंश के राजाओं का शासन था।
पाल क्षत्रिय थे। वे बौद्ध धर्मावलंबी थे, परंतु श्री वैद्य ख्1, के शब्दों में, ‘शायद वे केवल प्रारंभ में या नाममात्र के लिए बौद्ध थे।’ सेन राजाओं के संबंध में इतिहासकारों में मतभेद है। डॉ. भंडारकर का कहना है कि ये सब ब्राह्मण थे, जिन्होंने क्षत्रियों के सैनिक व्यवसाय को अपना लिया था। श्री वैद्य इस बात को बलपूर्वक कहते हैं कि सेन राजा आर्य क्षत्रिय या चंद्रवंशी राजपूत थे। कुछ भी हो, इसमें संदेह नहीं है कि राजपूतों की भांति सेन सनातन या रूढि़वादी धर्म के समर्थक थे। ख्2,
नर्मदा नदी के दक्षिण में, मुस्लिम आक्रमण के समय चार राज्य विद्यमान थेµ(1) पश्चिमी चालुक्यों का दक्कन राज्य, (2) चोलों का दक्षिण राज्य, (3) पश्चिमी तट पर कोंकण में सिलहाड़ा राज्य, तथा (4) पूर्वी तट पर त्रिकलिंग का गंग राज्य। ये राज्य सन् 1000-1200 के दौरान समृद्ध हुए। यही समय मुस्लिम आक्रमणों का था। उनके अधीन कुछ सामंती राज्य थे। ये राज्य 12वीं शताब्दी में पुनः शक्तिशाली हो गए और 13वीं शताब्दी में स्वतंत्र तथा शक्ति-संपन्न हो गए थे। ये राज्य हैंµ(1) देवगिरि जिस पर यादवों का शासन, (2) वारंगल जिस पर काकतीय वंश का शासन, (3) हैयबिड पर होयसल वंश का शासन, (4) मदुरा पर पांड्य वंश का शासन, तथा (5) त्रावणकोर पर चेर वंश के राजाओं का शासन था।
ये सब शासक रूढि़वादी ब्राह्मण धर्म के अनुयायी थे।
भारत पर मुस्लिम आक्रमण सन् 1001 में आरंभ हो गए थे। इन आक्रमणों की अंतिम लहर सन् 1296 में दक्षिण भारत में पहुंची, जब अलाउद्दीन खिलजी ने देवगिरि राज्य को अपने अधीनस्थ बनाया। भारत पर मुस्लिम विजय वास्तव में सन् 1296 तक पूरी नहीं हुई थी। अधीन बनाने के लिए ये युद्ध मुस्लिम विजेताओं तथा स्थानीय शासकों के बीच चलते रहे, जो यद्यपि पराजित हो गए थे, पर अधीन नहीं हुए थे। परंतु जिस बात को ध्यान में रखने की आवश्यकता है, वह यह है कि मुसलमानों के इन विजय-युद्धों
हिस्ट्री आफ मैडिवल हिंदू इंडिया, खंड 2, पृ. 142
वही, खंड 3, अध्याय 10