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बौद्ध धर्म की अवनति तथा पतन

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के सामने आसानी से हार मान ली और उन्होंने धर्मपरिवर्तन अपनी राजनीतिक

प्रतिष्ठा व स्थिति में वृद्धि की संभावनाओं के कारण किया था।य्

दुर्भाग्यवश, उन कारणों का पता नहीं लगाया गया है, जिन्होंने भारत के बौद्ध लोगों को इस्लाम के पक्ष में बौद्ध धर्म को त्यागने के लिए बाध्य किया था। इसलिए यह कहना असंभव है कि ब्राह्मण राजाओं का अत्याचार इसके लिए कहां तक उत्तरदायी था। परंतु ऐसे संकेतों की भी कमी नहीं है, जिनसे यह पता चलता है कि यही इसका प्रमुख कारण था। हमारे पास दो ऐसे राजाओं के निश्चित प्रमाण हैं, जो बौद्ध लोगों पर अत्याचार करते थे व उनका उत्पीड़न करते थे।

उनमें पहला नाम मिहिरकुल का है। वह हूण था। हूणों ने भारत पर सन् 455 के लगभग आक्रमण किया था। उत्तरी भारत में अपने राज्य की स्थापना की थी। उन्होंने पंजाब में साकल (आधुनिक स्यालकोट) को अपनी राजधानी बनाया था। मिहिरकुल ने सन् 528 के लगभग शासन किया। विन्सेंट स्मिथ का कहना हैः ख्1,

समस्त भारतीय परंपराएं मिहिरकुल को एक रक्त पिपासु, क्रूर व अत्याचारी

शासक के रूप में चित्रित करती हैं। ‘भारत के आतताई’ के रूप में इतिहासकारों

ने हूणों के स्वभाव की यह विशेषता नोट की कि साधारण मात्रा के कठोर और

क्रूर स्वभाव की अपेक्षा, वे अत्यधिक क्रूर स्वभाव के थे। मिहिरकुल ने शांतिपूण्

ार् बौद्ध पंथ के विरुद्ध क्रूर शत्रुता दर्शाई। उसने स्तूपों तथा मठों को निष्ठुरता

से नष्ट किया और वहां की सारी संपत्ति को लूट लिया। ख्2,

दूसरा राजा पूर्वी भारत का राजा शशांक था। उसने सातवीं शताब्दी के प्रथम दशक के लगभग शासन किया और वह हर्ष के विरुद्ध युद्ध में पराजित हुआ। विन्सेंट स्मिथ का कहना है ख्3, ः

शशांक को हर्ष के भाई का विश्वासघाती हत्यारा कहा गया है। वह संभवतः

गुप्त वंश का वंशज था। वह शिव का उपासक था और बौद्ध धर्म से घृणा

करता था। उसने बौद्ध धर्म का उन्मूलन करने का हर संभव प्रयास किया। एक

जनश्रुति के अनुसार उसने बुद्ध गया में पवित्र बोधि वृक्ष को जड़ से खुदवा

कर उसे जलवा दिया था, जिस पर अशोक की अत्यधिक भक्ति व श्रद्धा थी।

उसने पाटलिपुत्र में उस पत्थर को भी तोड़ दिया, जिस पर बुद्ध के पदचिह्न

  1. अर्ली हिस्ट्री आफ इंडिया (1924), पृ. 336

  2. वही, पृ. 337

  3. वही, पृ. 360