5. बौद्ध धर्म की अवनति तथा पतन - Page 117

102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अंकित थे। उसने मठों व आश्रमों को नष्ट कर दिया। भिक्षुओं को तितर-बितर

कर दिया। उसने इनका पीछा नेपाल की तराइयों तक किया।य्

सातवीं शताब्दी भारत में धार्मिक अत्याचार व उत्पीड़न की शताब्दी प्रतीत होती है। स्मिथ का कहना है ख्1, ः ‘सातवीं शताब्दी में दक्षिण भारत में इस जैसे ही धर्म जैनमत को भी नष्ट करने की भयंकर कोशिश की गई।’

जब मुस्लिम आक्रमण होने लगे, तब हमें सिंध का उदाहरण मिलता है, जहां पर उत्पीड़न व अत्याचार ही निस्संदेह बौद्ध धर्म के पतन का कारण बना। यह अत्याचार तथा उत्पीड़न मुसलमानों के आक्रमण तक जारी रहा। इसका अनुमान इस तथ्य से भी लग सकता है कि उत्तरी भारत में राजा या तो ब्राह्मण थे या राजपूत। ये दोनों ही बौद्ध धर्म के विरोधी थे। जैनियों पर 12वीं शताब्दी में भी अत्याचार हुए। इसका समर्थन इतिहास भी प्रचुर मात्रा में करता है। स्मिथ ने गुजरात के एक शैव राजा अजय देव का उल्लेख किया है, जो सन् 1174-76 में सिंहासन पर बैठा। उसने जैनियों पर निर्दयतापूर्वक अत्याचार से अपना शासन आरंभ किया था और उनके नेता को यातना देकर मरवा दिया था। स्मिथ लिखते हैंः ‘कठोर उत्पीड़न व अत्याचार के अनेक पुष्ट उदाहरणों का उल्लेख किया जा सकता है।’

इसलिए अब कोई संदेह नहीं रह जाता कि बौद्ध धर्म के पतन का कारण बौद्धों द्वारा इस्लाम धर्म को अंगीकार करना था। यह मार्ग उन्होंने ब्राह्मणवाद के अत्याचार व क्रूरता से बचने के लिए अपनाया था। यद्यपि प्रमाण इस निष्कर्ष की पुष्टि नहीं करते, पर कम से कम इसकी संभावना अवश्य दर्शाते हैं। उस समय यदि कोई संकट था, तो यह ब्राह्मणवाद के कारण था।