6. ब्राह्मण साहित्य - Page 121

106 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

शिक्षा और ज्ञान का अक्षय भंडार बना दिया जाए। इसलिए राजनीति, भूगोल, धनुर्विद्या जैसे ज्ञान के लगभग सभी क्षेत्रों से संबंधित सामग्री उन्होंने इसमें सम्मिलित की। सौति आवृति या पुनर्कथ्य के इतना अभ्यस्त थे कि भारत उनके हाथों से निकलकर निश्चय ही महाभारत बन गया। इसमें तनिक भी आश्चर्य नहीं लगता।

अब इसके तिथि-निर्धारण की बात करें। इसमें यद्यपि कौरवों और पांडवों के बीच हुए युद्ध की घटना अत्यंत प्राचीन घटना है फिर भी यह नहीं माना जा सकता कि व्यास रचित जय काव्य भी उतनी ही प्राचीन है, अर्थात हम उसे किसी घटना का समसामयिक काव्य नहीं कह सकते। तीनों संस्करणों का तिथि-निर्धारण करना संभव नहीं है। फिर भी इन सबके बारे में प्रो. होपकिन्स का निम्नलिखित कथन द्रष्टव्य है ख्1,

‘‘इस तरह महाभारत का रचना-काल सामान्यतः सन् 200 से सन् 400

के बीच ठहरता है। इस निर्णय पर पहुंचते वक्त हमने न तो इसके उत्तरवर्ती

संस्करणों पर ध्यान दिया है और न ही इसके विभिन्न कथ्यों के परिवर्तित

रूपों पर, जो कदाचित अनुगामी प्रतिलिपिकारों के हाथों से गुजरते हुए माने

जा सकते हैं।’’

किंतु कुछ ऐसे साक्ष्य हैं, जिनके आधार पर निश्चयपूर्वक यह कहा जा सकता है कि यह बाद की रचना है।

महाभारत में हूणों से संबंधित उल्लेख आया है। स्कंदगुप्त ने हूणों से युद्ध किया था और उसने इन पर सन् 455 में या उसके आसपास विजय पाई थी। इस पराजय के बावजूद हूणों के आक्रमण सन् 528 तक होते रहे। इससे स्पष्ट हो जाता है कि महाभारत की रचना उसके काल में या इसके बाद हुई होगी।

कुछ और भी संकेत मिले हैं, जो इसे और भी बाद की रचना बताते हैं। महाभारत में म्लेच्छों अथवा मुसलमानों का उल्लेख हुआ है। महाभारत के वन पर्व के 190वें अध्याय के 29वें श्लोक में रचनाकार कहता है कि ‘सारा संसार इस्लाममय हो जाएगा। सभी यज्ञ, अनुष्ठान, विधि-विधान, पर्व और त्यौहार समाप्त हो जाएंगे, इसका सीधा संबंध मुसलमानों से है। यद्यपि इसका संबंध भविष्य से है, फिर भी चूंकि महाभारत पुराण काव्य है और पुराणों में ‘जो हो गया है’ उसका कथन होता है, इसलिए इसे भी इसी अर्थ में लेना चाहिए। इस श्लोक की इस तरह व्याख्या कर लेने पर यह सिद्ध हो जाता है कि महाभारत की रचना भारत पर मुसलमानों के आक्रमण के बाद हुई होगी।

  1. दि गे्रट इपिक आफ इंडिया, प्रो. होपकिन्स, पृ. 389