6. ब्राह्मण साहित्य - Page 126

ब्राह्मण साहित्य

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सकता। प्रो. रोजवाडे ख्1, भी इनसे पूर्णतः सहमत लगते हैं। वह कहते हैं कि जिन लोगों का भगवत्गीता की रचना में हाथ रहा होगा, उन्हें व्याकरण के नियम भी मालूम नहीं थे।

सभी इस तथ्य से तो सहमत हैं कि अलग-अलग संपादकों के हाथों में पड़कर गीता के अलग-अलग संस्करण तैयार हुए, किंतु उनमें इस बात को लेकर असहमति है कि गीता में कौन से अंश जोड़े गए हैं। स्वर्गीय राजाराम शास्त्री भागवत के अनुसार मूल गीता में केवल साठ श्लोक थे। हम्बोल्ड्ट का यह विचार रहा कि मूलतः गीता में केवल आरंभिक ग्यारह अध्याय ही थे। बारहवें से लेकर अट्ठारहवें अध्याय तक की समस्त सामग्री बाद में जोड़ी गई थी। होपकिन्स के अनुसार गीता के आरंभिक चौदह अध्याय ही उसका मर्म है। प्रो. राजवाडे दसवें और ग्यारहवें अध्यायों को प्रक्षिप्त मानते हैं। प्रो. गार्बे कहते हैं कि भगवत्गीता के 146 छंद नए हैं, जो मूल गीता के अंश नहीं थे। इसका अर्थ यह है कि गीता का लगभग पांचवां हिस्सा नया है।

गीता का लेखक कौन है, इसके बारे में कहीं उल्लेख नहीं मिलता। गीता तो समरभूमि में अर्जुन और कृष्ण का संवाद है, जिसमें कृष्ण ने अपने दर्शन का प्रतिपादन अर्जुन के समक्ष किया था। इस संवाद का प्रत्याख्यान संजय ने कौरवों के पिता धृतराष्ट्र के सम्मुख किया था। गीता को तो महाभारत का अंश होना चाहिए था, क्योंकि जिस अवसर पर यह संवाद हुआ था, वह महाभारत की एक घटना का स्वाभाविक अंश है। किंतु गीता महाभारत का अंश नहीं है, यह तो एक अलग से स्वतंत्र रचना है। फिर भी, इसके लेखक का नाम इसमें नहीं मिलता। हम तो केवल इतना जानते हैं कि व्यास ने संजय को आदेश दिया कि युद्ध-भूमि में अर्जुन और कृष्ण के बीच जो संवाद हुआ, उसे वह धृतराष्ट्र को सुनाए। इसलिए यह माना जा सकता है कि व्यास ही गीता के लेखक रहे होंगे।

वेदांत सूत्र

पहले कहा जा चुका है कि वैदिक साहित्य में वेद, ब्राह्मण ग्रंथ, आरण्यक और उपनिषद् सम्मिलित हैं। विषय-वस्तु के अनुसार इस तरह के साहित्य को दो वर्गों में बांटा जा सकता हैः (1) कर्मकांड अर्थात धार्मिक नियम, संस्कार तथा अनुष्ठान आदि से संबंधित साहित्य, और (2) ज्ञानकांड अर्थात ईश्वर (वैदिक संज्ञा-ब्रह्म) का ज्ञान कराने वाला साहित्य। चारों वेद और ब्राह्मण ग्रंथ वैदिक साहित्य के प्रथम वर्ग में आते हैं, तो आरण्यक और उपनिषद द्वितीय वर्ग में।

वैदिक साहित्य की मात्रा बढ़ते-बढ़ते असीमित हो गई, किंतु महत्वपूर्ण तथ्य तो यह है कि यह वृद्धि जंगली घास की तरह हुई। इस तरह जो दुर्व्यवस्था फैली, उससे छुटकारा

  1. भंडारकर मैमोरियल वॉल्यूम