ब्राह्मण साहित्य
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यह बादरायण कौन है? उसने इन सूत्रों का प्रणयन क्यों किया और कब किया? इस नाम को छोड़कर बादरायण के बारे में और कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। ख्1, यह भी निश्चित नहीं है कि लेखक का यह नाम वास्तविक नाम था या नहीं। यहां तक कि इन सूत्रों के बड़े-बड़े भाष्यकारों में भी इन सूत्रों के रचयिता के बारे में पर्याप्त मतभेद हैं। कुछ कहते हैं कि इनके लेखक बादरायण थे। कुछ कहते हैं कि इन सूत्रों के रचयिता व्यास हैं। शेष लोगों का मत है कि बादरायण और व्यास एक ही व्यक्ति हैं। इन सूत्रों के रचयिता के बारे में इतने मतभेद देखकर आश्चर्य होता है।
उसने इन सूत्रों की रचना क्यों की? हर कोई इस बात को भली-भांति स्वीकार कर लेगा कि ब्राह्मणों का यह कर्तव्य था कि वे वैदिक साहित्य के कर्मकांड विषयक साहित्य को व्यवस्थित और वर्गीकृत करें, क्योंकि कर्मकांड से उनका गहरा संबंध था। उनकी आजीविका का साधन कर्मकांड ही था। दूसरी ओर, वैदिक साहित्य की ज्ञानकांड शाखा में उनकी रुचि नहीं थी। तब वे इसे भी व्यवस्थित करने का प्रयत्न क्यों करते? ऐसा प्रश्न अभी तक न तो किसी ने उठाया है, और न ही इस विषय में अभी तक कुछ विचार ही हुआ है। किंतु यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है और इसका उत्तर देना भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। प्रश्न महत्वपूर्ण क्यों है और उसका उत्तर क्या है, इसका विवेचन मैं आगे चलकर करूंगा।
वेदांत सूत्र के बारे में दो प्रश्न और हैं। पहला, इसे धर्मशास्त्र विषयक कृति माना जाए या विशुद्ध दर्शन विषयक? या सूत्रकार ने इसकी रचना कर दर्शन को स्थापित धर्मशास्त्र के साथ गठबंधन करना चाहा है, ताकि धार्मिक कर्मकांड को घातक और हानिकर होने से बचाया जा सके। अगला प्रश्न वेदांत सूत्र के भाष्यों से संबंधित है। कुल मिलाकर पांच भाष्य उपलब्ध हैं, जो सुप्रसिद्ध आचार्यों के हैं। ये सभी बौद्धिक दृष्टि से मेधावी विद्वान थे। इनके नाम हैंः 1. शंकराचार्य (788-820 ई.), 2. रामानुजाचार्य (1017-1137 ई.), 3. निंबार्काचार्य (मृत्यु लगभग 1162 ई.), 4. मध्वाचार्य (1197-1276 ई.), और 5. बल्लभाचार्य (जन्म 1417 ई.)। इन आचार्यों की वेदांत सूत्र की व्याख्या वेदांत सूत्र से भी अधिक प्रसिद्ध हुई। इनके बारे में महत्वपूर्ण बात यह है कि वेदांत सूत्र के एक ही पाठ
- यही बात जैमिनि पर भी लागू होती है। केन का कथन है µ ‘जैमिनि के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है।
जैमिनि के नाम से एक ब्राह्मण ग्रंथ, एक स्त्रोत सूत्र और एक गृह्य सूत्र मिलते हैं। किंतु इस बात की
संभावना प्रतीत नहीं होती कि ये ग्रंथ पूर्व मीमांसाकार की ही रचनाएं हैं। आश्वलायन गृह्य सूत्र के
‘तर्पण’ में सुमंतु और वैशम्पायन के साथ जैमिनि का उल्लेख मिलता है। भगवत् पुराण में जैमिनि को
सुमंतु का गुरु और सामवेद का प्रणेता बताया गया है। पंचतंत्र के अनुसार, मीमांसाकार जैमिनि की मृत्यु
हाथी के पांव तले दब कर हुई थी। (ए ब्रीफ स्केच आफ दि पूर्व मीमांसा सिस्टम, पृष्ठ 12)