116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
भी उस घटना की ही तरह प्राचीन है अथवा उस घटना की समकालीन रचना है। प्रत्येक संस्करण का तिथि-निर्धारण करना कठिन कार्य है। इस संपूर्ण कृति पर विचार करते हुए प्रो. होपकिन्स लिखते हैंः ख्1,
फ्इस तरह मोटे तौर पर संपूर्ण महाभारत का रचना काल सन् 200 से सन् 400 के बीच का ठहरता है। यह निर्धारण करते समय न तो उत्तरवर्ती काल में हुए बाद के संस्करणों को, जैसा कि हम जानते हैं, ध्यान में रखा गया है और न ही उन वाचिक रूप में हुए परिवर्तनों-परिवर्धनों को ध्यान में रखा गया है, जो परवर्ती प्रतिलिपिकारों के हाथों हुए होंगे।य्
किंतु कुछ अन्य साक्ष्यों के आधार पर निश्चयपूर्वक यह कहा जा सकता है कि इसकी रचना इससे भी बाद में हुई होगी।
महाभारत में हूणों का उल्लेख मिलता है। स्कंदगुप्त ने हूणों से युद्ध किया था और उन्हें सन् 455 में या उसके आसपास पराजित किया। इसके बावजूद हूणों के आक्रमण सन् 528 तक होते रहे। स्पष्ट है कि महाभारत की रचना उस समय या उसके बाद में हुई होगी।
प्रो. कोसांबी ख्2, ने कुछ और भी संकेत दिए हैं, जो इसे और बाद की रचना सिद्ध करते हैं। महाभारत में म्लेच्छों अथवा मुसलमानों का जिक्र हुआ है। महाभारत के वन पर्व के 190वें अध्याय के 29वें श्लोक में रचनाकार कहता है कि ‘सारा संसार इस्लामय हो जाएगा। सभी यज्ञ, अनुष्ठान, विधि-विधान, पर्व और त्यौहार समाप्त हो जाएंगे।’ इस कथन का सीधा संबंध मुसलमानों से है। यद्यपि इसका संबंध भविष्यत काल से है, फिर भी, चूंकि महाभारत पुराण काव्य है और पुराणों में जो हो गया है, उसी का कथन होता है, इसलिए इसे भी इसी अर्थ में लेना चाहिए। इस श्लोक की इस तरह व्याख्या कर लेने पर यह सिद्ध हो जाता है कि महाभारत की रचना भारत पर मुसलमानों के आक्रमण के बाद ही हुई होगी।
कुछ अन्य संदर्भों से भी इसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
इसी अध्याय के 59वें श्लोक में कहा गया है कि ‘वृषलों के सताए हुए ब्राह्मण भय से पीडि़त हो हाहाकार करने लगेंगे और कोई रक्षक न मिलने के कारण सारी पृथ्वी पर निश्चय ही भटकते फिरेंगे।’
प्रो. होपकिन्स, दि गे्रट इपिक आफ इंडिया, पृ. 389
हिंदू संस्कृति आणि अहिंसा (मराठी)