6. ब्राह्मण साहित्य - Page 132

ब्राह्मण साहित्य

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इस श्लोक में जिन वृषलों की ओर संकेत है, वे बौद्ध नहीं हो सकते। इस बात का लेशमात्र भी प्रमाण नहीं मिलता कि बौद्धों के हाथों ब्राह्मणों को कभी सताया गया हो। उलटे, इस बात के प्रमाण तो मिले हैं कि बौद्धों के शासन-काल में बौद्ध भिक्षुओं की ही तरह ब्राह्मणों के साथ उदारता का व्यवहार किया जाता था। यहां वृषल से अर्थ है असभ्य और ऐसा विशेषण मुसलमान आक्रांताओं के लिए ही प्रयुक्त हुआ लगता है।

यदि यह बात सही है, तब तो यह मानना ही पड़ेगा कि महाभारत का कुछ अंश निश्चय ही भारत पर मुसलमानों के आक्रमण के बाद लिखा गया होगा।

वन पर्व के इसी अध्याय में कुछ अन्य श्लोक भी हैं जो इसी निष्कर्ष की ओर संकेत करते हैं। ये हैंः 65वां, 66वां और 67वां श्लोक। इनसे भी यही निष्कर्ष निकलता है। इनमें कहा गया है कि ‘समाज अव्यवस्थित हो जाएगा। लोग एडूकों की पूजा करेंगे। वे देवों का बहिष्कार करेंगे। शूद्र, द्विजों की सेवा नहीं करेंगे। सारे संसार में एडूक व्याप्त हो जाएंगे। युग का अंत हो जाएगा।’

यहां ‘एडूक’ शब्द का बहुत ही महत्व है। कुछ ने इस शब्द का अर्थ बौद्ध चैत्य लगाया है। यह इसलिए कि एडूक का अर्थ है हड्डी, विशेषकर बुद्ध की अस्थियां। आगे चलकर इसका अर्थ हुआ चैत्य, क्योंकि चैत्य में बुद्ध की अस्थियां होती हैं, किंतु श्री कोसांबी के मतानुसार यह अर्थ ठीक नहीं है। न तो बौद्ध साहित्य में, और न ही वैदिक साहित्य में कहीं भी ‘एडूक’ शब्द ‘चैत्य’ के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। उलटे, अमरकोश और उसके व्याख्याकार महेश भट्ट के अनुसार तो एडूक का अर्थ ऐसी दीवार है, जिसे लकड़ी के ढांचे से पुष्ट किया गया हो। इस अर्थ को ध्यान में रखते हुए कोसांबी ने इस शब्द का अर्थ ‘ईदगाह’ लगाया है, जहां मुसलमान नमाज अदा करते हैं। यदि यह व्याख्या सही है, तब तो स्पष्ट रूप से यही कहा जा सकता है कि महाभारत के कुछ अंश मुसलमानों के आक्रमणों, विशेषकर मौहम्मद गौरी के आक्रमणों के बाद लिखे गए थे। मुसलमानों का पहला आक्रमण इब्ने कासिम के नेतृत्व में सन् 721 में हुआ था। उसने उत्तरी भारत के कुछ भागों पर कब्जा तो कर लिया था, किंतु वहां के मंदिरों और विहारों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया, और न ही दोनों धर्मों के पुजारियों का संहार ही किया था। उसने मस्जिदें और ईदगाह नहीं बनवाईं। यह काम तो मौहम्मद गौरी ने किया। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि महाभारत का लेखन सन् 1200 तक चलता रहा होगा। रामायण

यह एक तथ्य है कि महाभारत की ही तरह रामायण के भी एक-एक कर तीन संस्करण तैयार हुए। महाभारत में रामायण के बारे में दो प्रकार के संदर्भ मिलते हैं। एक प्रसंग में रामायण का तो संदर्भ आया है, किंतु उसके लेखक का उल्लेख कहीं नहीं