6. ब्राह्मण साहित्य - Page 133

118 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मिलता_ दूसरे प्रसंग में वाल्मीकि रामायण का उल्लेख हुआ है, किंतु इन दिनों जो रामायण उपलब्ध है, वह वाल्मीकि रचित नहीं है। ख्1, श्री सी.वी. वैद्य ख्2, के मतानुसारः

‘वर्तमान रामायण वाल्मीकि द्वारा लिखित रामायण नहीं है, चाहे इसे इसी रूप में महान चिंतक और भाष्यकार कटक ने ही क्यों न स्वीकार किया हो। कट्टर से कट्टर विचारक भी इस तथ्य को स्वीकार करने में नहीं हिचकिचाएगा। चाहे कोई वर्तमान रामायण को सरसरी तौर पर ही क्यों न पढ़े, वह उसमें आई असंगतियों को देखकर पूर्व प्रसंगों में परस्पर संबंधहीनता देखकर या काफी मात्रा में उपलब्ध नूतन, और पुरातन, दोनों प्रकार के विचारों के गठबंधन को देखकर हतप्रभ रह जाएगा। यह बात रामायण के बंगाल या बंबई वाले किसी भी पाठ में देखी जा सकती है। इन सब बातों को देखकर कोई भी इस नतीजे पर अवश्य पहुंचेगा कि वाल्मीकि की रामायण में आगे चलकर बहुत फेर-बदल हुआ।’

महाभारत की ही तरह रामायण की कथावस्तु में भी कालांतर में क्षेपक जुड़ते गए। आरंभ में रामायण की कथा मात्र इतनी ही थी कि रावण ने राम की पत्नी सीता का हरण कर लिया, इसलिए राम और रावण के बीच युद्ध हुआ। अगले संस्करण में इस कथा में कुछ उपदेश भी जुड़ गए। तब एक विशुद्ध ऐतिहासिक काव्य के स्थान पर यह कृति भी उपदेशात्मक बन गई, जिसका उद्देश्य सामाजिक, नैतिक और धार्मिक कर्तव्यों के सही नियमों की शिक्षा देना था। जब इसका तीसरा संस्करण बना तो यह भी महाभारत की ही तरह दंतकथाओं, ज्ञान, शिक्षा, दर्शन तथा अन्य कलाओं और विज्ञानों का भंडार बन गई।

रामायण की रचना कब हुई, इसके बारे में एक सुस्थापित कथन यह है कि राम वाली घटना पांडवों वाली घटना से अधिक पुरानी है, किंतु रामायण और महाभारत का लेखन-कार्य साथ ही चला होगा। हो सकता है कि रामायण के कुछ अंश महाभारत से पहले लिखे गए हों, किंतु इस बात में किसी तरह का संदेह नहीं हो सकता कि रामायण का अधिकांश भाग महाभारत के अधिकांश भाग के लिखे जाने के बाद ही लिखा गया होगा। ख्3,

पुराण

इस समय उपलब्ध पुराणों की संख्या अट्ठारह है। ख्4, शुरू में पुराणों की संख्या इतनी

  1. होपकिन्स, दि गे्रट इपिक ऑफ इंडिया, पृ. 62

  2. दि रिडिल ऑफ दि रामायण, अध्याय 2, पृ. 6

  3. इन दोनों महाकाव्यों में समान वाक्य खंडों के लिए होपकिन्स की पुस्तक दि गे्रट इपिक ऑफ इंडिया

का परिशिष्ट ‘ए’ देखें।

  1. पुराणों की सामग्री के बारे में जो कुछ मैंने ऊपर कहा है, वह काले की पुराण निरीक्षण (मराठी) और

पार्टीजर की एनसिएंट हिस्टोरिकल ट्रेडिशन नामक पुस्तक में दी गई सूचना पर आधारित है।