122 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के आधार पर ही किया जा सकता है, जिनसे संबंधित घटनाओं की तिथियां मान्य हो चुकी हैं। कौन-सा पुराण कब लिखा गया, इस विषय पर उतनी बारीकी से अभी तक विचार नहीं हुआ है, जितना अन्य ब्राह्मणवादी साहित्यिक विधाओं पर हो चुका है। विद्वान शोधकर्ताओं ने वैदिक साहित्य पर जितना अधिक ध्यान दिया है, उतना पुराण साहित्य पर नहीं दिया लगता है। मेरी जानकारी के अनुसार अब तक केवल श्री हजारा ने ही पुराणों के काल-निर्धारण के क्षेत्र में काम किया है। उनके काम का सारांश नीचे दिया जा रहा हैः
पुराण रचना-काल
मार्कंडेय सन् 200-600 के बीच
वायु सन् 200-500 के बीच
ब्रह्मांड सन् 200-500 के बीच
विष्णु सन् 100-350 के बीच
मत्स्य कुछ अंश लगभग सन् 325
कुछ अंश लगभग सन् 1100
भागवत् सन् 500-600 के बीच
कूर्म सन् 550-1000 के बीच
वामन सन् 700-1000 के बीच
लिंग सन् 600-1000 के बीच
वराह सन् 800-1500 के बीच
पद्म सन् 600-950 के बीच
बृहन्नारदीय सन् 875-1000 के बीच
अग्नि सन् 800-900 के बीच
गरुड़ सन् 850-1000 के बीच
ब्रह्म सन् 900-1000 के बीच
स्कंद सन् 700 के बाद
ब्रह्म वैवर्त सन् 700 के बाद
भविष्य सन् 500 के बाद
पुराणों के रचना-काल का इससे अधिक सटीक निर्धारण फिलहाल संभव नहीं है। नई खोज से इस अवधि की ऊपरी और निचली, दोनों सीमाओं का पुनर्निर्धारण तो