ब्राह्मण साहित्य
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उतना ही प्रयोजन होता है जितना किसी जलाशय से ऐसे समय होता है जब सर्वत्र बाढ़ आई होती है।
9.21. इस विशाल स्वर्गलोक को भोगकर वे पुण्य का क्षय हो जाने पर मृत्युलोक में प्रवेश करते हैं। इस प्रकार तीनों वेदों की निषेधाज्ञाओं का पालन करते, इच्छाओं की पूर्ति की कामना लिए वे आते और जाते हैं।
(अपूर्ण)